॥ अथ श्री गणेशाष्टकम् ॥
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श्री गणेशाष्टकम् भगवान श्री गणेश की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जो गणेश पुराण के उपासनाखण्ड में प्राप्त होता है। इस अष्टकम् में भगवान गणपति को सम्पूर्ण सृष्टि का मूल कारण, सर्वशक्तिमान, परब्रह्म स्वरूप तथा विघ्नों का नाश करने वाला बताया गया है।
यह स्तोत्र यह दर्शाता है कि अग्नि, सूर्य, चन्द्र, वायु, जल, स्थावर-जंगम, देव-दानव, मनुष्य – सब कुछ उसी गणेश तत्त्व से उत्पन्न हुआ है। जो साधक श्रद्धा से इसका पाठ करता है, उसके जीवन से बाधाएँ दूर होती हैं और सभी कार्य सफल होते हैं।
श्री गणेशाय नमः।
सर्वे उचुः।
यतोऽनन्तशक्तेरनन्ताश्च जीवायतो निर्गुणादप्रमेया गुणास्ते।
यतो भाति सर्वं त्रिधा भेदभिन्नं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥१॥
यतश्चाविरासीज्जगत्सर्वमेतत्तथाऽब्जासनो विश्वगो विश्वगोप्ता।
तथेन्द्रादयो देवसङ्घा मनुष्याः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥२॥
यतो वह्निभानू भवो भूर्जलं च यतः सागराश्चन्द्रमा व्योम वायुः।
यतः स्थावरा जङ्गमा वृक्षसङ्घा सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥३॥
यतो दानवाः किन्नरा यक्षसङ्घा यतश्चारणा वारणाः श्वापदाश्च।
यतः पक्षिकीटा यतो वीरूधश्च सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥४॥
यतो बुद्धिरज्ञाननाशो मुमुक्षोर्यतः सम्पदो भक्तसन्तोषिकाः स्युः।
यतो विघ्ननाशो यतः कार्यसिद्धिः सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥५॥
यतः पुत्रसम्पद्यतो वाञ्छितार्थो यतोऽभक्तविघ्नास्तथाऽनेकरूपाः।
यतः शोकमोहौ यतः काम एव सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥६॥
यतोऽनन्तशक्तिः स शेषो बभूव धराधारणेऽनेकरूपे च शक्तः।
यतोऽनेकधा स्वर्गलोका हि नाना सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥७॥
यतो वेदवाचो विकुण्ठा मनोभिः सदा नेति नेतीति यत्ता गृणन्ति।
परब्रह्मरूपं चिदानन्दभूतं सदा तं गणेशं नमामो भजामः॥८॥
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॥ फल श्रुति ॥
श्रीगणेश उवाच।
पुनरूचे गणाधीशः स्तोत्रमेतत्पठेन्नरः।
त्रिसन्ध्यं त्रिदिनं तस्य सर्वं कार्यं भविष्यति॥९॥
यो जपेदष्टदिवसं श्लोकाष्टकमिदं शुभम्।
अष्टवारं चतुर्थ्यां तु सोऽष्टसिद्धिरवानप्नुयात्॥१०॥
यः पठेन्मासमात्रं तु दशवारं दिने दिने।
स मोचयेद्वन्धगतं राजवध्यं न संशयः॥११॥
विद्याकामो लभेद्विद्यां पुत्रार्थी पुत्रमाप्नुयात्।
वाञ्छितांल्लभते सर्वान् एकविंशतिवारतः॥१२॥
यो जपेत्परया भक्त्या गजाननपरो नरः।
एवमुक्त्वा ततो देवश्चान्तर्धानं गतः प्रभुः॥१३॥
॥ इति श्रीगणेशपुराणे उपासनाखण्डे श्रीगणेशाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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सरल अर्थ (Summary Meaning)
इस स्तोत्र में कहा गया है कि भगवान गणेश अनन्त शक्तियों से युक्त हैं और उन्हीं से सम्पूर्ण जगत की उत्पत्ति हुई है। बुद्धि, विद्या, वैराग्य, भक्ति, समृद्धि तथा मोक्ष – सब कुछ उन्हीं की कृपा से प्राप्त होता है।
वे अज्ञान का नाश करते हैं, विघ्नों को दूर करते हैं और भक्तों को कार्य-सिद्धि प्रदान करते हैं। वे ही परब्रह्म, चिदानन्द स्वरूप और वेदों द्वारा वर्णित परम सत्य हैं। जो भक्त प्रेमपूर्वक उनका स्मरण करता है, उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
