विष्णु

Vishnu for You & Your Family

बदलता है समय, बदलती है दुनिया — पर विष्णु ही शाश्वत रहते हैं।
भगवान विष्णु केवल एक नाम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि के पालन और संतुलन की दिव्य चेतना हैं। वे करुणा, धैर्य, धर्म और संरक्षण के शाश्वत प्रतीक हैं। विष्णु शब्द मात्र उच्चारण नहीं—एक अनुभव है; वे आदि में भी हैं, अंत में भी… और उस निरंतर प्रवाह में भी जहाँ जीवन स्थिरता पाता है और आत्मा को आधार मिलता है।

विष्णु

विष्णु का श्रद्धा-पूर्वक स्मरण और जप मन को स्थिर करता है, चिंता और भय को दूर करता है तथा जीवन में संतुलन, समृद्धि और सकारात्मकता लाता है। परिवार के साथ श्रीहरि का नित्य ध्यान करने से घर में शांति, प्रेम और सौहार्द बना रहता है।

विष्णु विश्वास हैं… विष्णु आधार हैं… विष्णु ही जीवन का संतुलन और संरक्षण हैं।

श्री विष्णु संग्रह

भगवान विष्णु की कृपा और भक्ति को समर्पित यह संग्रह मंत्र, स्तोत्र, आरती, चालीसा और एकादशी व्रत से जुड़े पावन पाठों को एक स्थान पर प्रस्तुत करता है।

श्री विष्णु चालीसा

विष्णु सुनिए विनय
Vishnu Suniye Vinay

नारायण आरती (Narayan Aarti)

भगवान सत्यनारायण आरती

जय लक्ष्मीरमणा
Jai Lakshmi Ramana

श्री लक्ष्मीनारायण आरती

जय लक्ष्मी-विष्णो।
Jai Lakshmi Vishno

भगवान बदरीनाथ आरती

जय जय श्री बदरीनाथ,
Jai Jai Shri Badrinath

भगवान पुरुषोत्तम आरती

जय पुरुषोत्तम देवा,
Jai Purushottam Deva

विष्णु अष्टकम् (Vishnu Ashtakam)

विष्णु स्तोत्रम् (Vishnu Stotram)

भगवान विष्णु

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता

Vishnu त्रिमूर्ति के पालनकर्ता देव हैं। वे सृष्टि की रक्षा और धर्म की स्थापना हेतु समय-समय पर अवतार लेते हैं। शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए श्रीहरि विष्णु शांति, संतुलन और करुणा के प्रतीक माने जाते हैं। भक्त उनके नाम, मंत्र और स्तोत्र का जप करके जीवन में स्थिरता, समृद्धि और संरक्षण की कामना करते हैं।
भगवान विष्णु धर्म और सत्य की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं (दशावतार)।
वे पालन-पोषण, संरक्षण और समृद्धि के देवता हैं।
विष्णु उपासना से भय, बाधा और अस्थिरता दूर होती है।
परिवार और गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और संतुलन बना रहता है।

विष्णु का अर्थ है — “जो सर्वत्र व्याप्त हैं।”
उनका शंख (पाञ्चजन्य) धर्म की ध्वनि, चक्र (सुदर्शन) अधर्म का नाश, गदा (कौमोदकी) शक्ति, और कमल (पद्म) पवित्रता का प्रतीक है।

विष्णु की पूजा क्यों की जाती है?

सृष्टि के पालनकर्ता, धर्म के रक्षक और करुणा के सागर हैं। वे अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर जीवन में शांति, सुरक्षा और संतुलन प्रदान करते हैं।

विष्णु की पूजा केवल सुख-समृद्धि या वरदान प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में धैर्य, कर्तव्य, सत्य और धर्म का पालन करने की प्रेरणा के लिए भी की जाती है।

श्रीहरि का स्मरण मन को स्थिर करता है, भय और चिंता को दूर करता है तथा परिवार में प्रेम और सौहार्द बनाए रखता है।

भगवान विष्णु की भक्ति के लाभ

भक्ति और एकाग्रता से

कष्टों से मुक्ति- भगवान विष्णु धर्म के रक्षक और पालनकर्ता हैं। सच्चे मन से किया गया स्मरण जीवन की बाधाओं को सरल बनाता है और कठिनाइयों से मार्ग दिखाता है।
मन की शांति और स्थिरता- श्रीहरि का नाम जप मन को शांत करता है, तनाव कम करता है और जीवन में धैर्य तथा संतुलन स्थापित करता है।
सुख और समृद्धि- श्रीहरि की कृपा से घर में सौभाग्य, शांति और समृद्धि का वास होता है।
आध्यात्मिक उन्नति- नियमित भक्ति व्यक्ति को धर्म, सद्बुद्धि और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करती है।

श्रद्धा और मनोकामना के अनुसार

नियमित पाठ ईश्वर की कृपा

भगवान विष्णु की श्रद्धा और एकाग्रता से की गई भक्ति जीवन में संतुलन, सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करती है। भगवान विष्णु विश्वास हैं, संरक्षण हैं और जीवन के संतुलन के आधार हैं।

“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अत्यंत प्रभावशाली और मोक्षदायक मंत्र है।

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लक्ष्मी

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मां लक्ष्मी के वैदिक मन्त्र
माँ लक्ष्मी के मंत्रों का जप धन का मार्ग खोलता है।

लक्ष्मी माता आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता,
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लक्ष्मी चालीसा
मातु लक्ष्मी करि कृपा,
Matu Lakshmi kari kripa,


श्री महालक्ष्मी अष्टकम्
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
Namaste’stu Mahamaye Shree


कनकधारा स्तोत्रम्
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती
Angam Hareh Pulak Bhushanam


अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्
सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि,
Sumanasa Vandita Sundari


श्री सिद्धिलक्ष्मी स्तोत्रम्
ॐ अस्य श्रीसिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रस्य
Om Asya Shri Siddhi Lakshmi


धनदालक्ष्मी स्तोत्रम्
देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं
Devi Devam Upagamya

हनुमान आरती
आरती कीजै हनुमान लला की।
Aarti Kije Hanuman


श्री बालाजी आरती
ॐ जय हनुमत वीर स्वामी
Om Jai Hanumat Veer


श्री पवनसुत हनुमान आरती
जयति मंगलागार संसार
Jayati Mangalagaar


श्री हनुमान ताण्डव स्तोत्रम्
वन्दे सिन्दूरवर्णाभं
Vande Sindoor


संकट मोचन हनुमानाष्टक
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शिव

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Vaidik Mantra
शिव के वैदिक मन्त्र

शिव स्तुति
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Ashutosh Shashank Shekhar


शिव चालीसा
जय गिरिजा पति
Jai Girija Pati


शिव आरती
ॐ जय शिव ओंकारा
Om Jai Shiv Omkara


शिव अष्टकम्
प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं
Prabhum Prananatham


श्रीरुद्राष्टकम्
नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं
Namami Shamishan


श्री लिङ्गाष्टकम्
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासित
Brahma Murari Surarchita


श्री शिव मृत्युञ्जय स्तोत्रम्
रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश‍ृङ्गनिकेतनं
Ratnasanu Sharasanam Rajatadri


शिव ताण्डव स्तोत्रम्
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
Jatatavi Galajjala Pravaha


द्वादशज्योतिर्लिङ्ग स्तोत्रम्
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं
Saurashtra Deshe Vishade Atiramye


रुद्राभिषेक स्तोत्रम्
ॐ नमो भवाय शर्वाय रुद्राय वरदाय च।
Om Namo Bhavaya Sharvaya


सहस्रनाम स्तोत्रम्
ॐ हिरण्यबाहुः सेनानीर्दिक्पतिस्तरुराट्
Om Hiranyabahuh Senanirdikpatistarurat

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