॥ 33 कोटि देवता मंत्र ॥
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सनातन धर्म में “त्रयस्त्रिंशत् कोटि देवता” अर्थात 33 कोटि देवताओं का उल्लेख वेदों और पुराणों में मिलता है। यह मंत्र सभी देवताओं को एक साथ प्रणाम करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का शक्तिशाली स्तोत्र माना जाता है। इस मंत्र के जप से व्यक्ति समस्त देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करता है और जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा रक्षा का अनुभव करता है।
यह मंत्र सभी देवताओं को एक साथ स्मरण करने का सरल और प्रभावी तरीका है।
यदि आप इसे श्रद्धा से जप करते हैं, तो जीवन में शांति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा अवश्य प्राप्त होती है।
॥ 33 कोटि देवता मंत्र ॥
ॐ नमो त्रयस्त्रिंशत् कोटि देवताभ्यः।ॐ नमो त्रयस्त्रिंशत् कोटि देवताभ्यः।
नमो वसुभ्यः, नमो रुद्रेभ्यः, नमो आदित्येभ्यः।
Om Namo Trayastrinshat Koti Devatabhyaḥ।
Om Namo Trayastrinshat Koti Devatabhyaḥ॥
नमो इन्द्राय, नमः प्रजापतये।
ॐ अनन्ताय, ब्रह्मणे, विष्णवे, महेश्वराय च नमः।
Namo Vasubhyaḥ, Namo Rudrebhyaḥ, Namo Adityebhyaḥ।
Namo Indraya, Namah Prajapataye॥
सर्वे देवाः मम रक्षणं कुर्युः।
Sarve Devah Mama Rakshanam Kuryuh॥
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये, सर्वपापप्रणाशिनि,
देवतासंयुक्तं स्तोत्रं इदं स्वीकुरु स्वाहा॥
Sarva Mangala Mangalye, Sarva Papa Pranashini,
Devatasamyuktam Stotram Idam Sweekuru Swaha॥
ॐ नमो त्रयस्त्रिंशत् कोटि देवताभ्यः।
Om Namo Trayastrinshat Koti Devatabhyaḥ॥
नमो वसुभ्यः, नमो रुद्रेभ्यः, नमो आदित्येभ्यः।
नमो इन्द्राय, नमः प्रजापतये॥
Namo Vasubhyaḥ, Namo Rudrebhyaḥ, Namo Adityebhyaḥ।
Namo Indraya, Namah Prajapataye॥
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अलग-अलग देवताओं की पूजा नहीं कर पाते,
ऐसे में यह मंत्र सभी देवताओं को एक साथ स्मरण करने का सबसे सरल उपाय है।
33 कोटि देवता मंत्र का माहात्म्य
33 कोटि देवता मंत्र का जप करने से भक्त सभी देवताओं की कृपा प्राप्त करता है। शास्त्रों के अनुसार इन 33 देवताओं में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इन्द्र और प्रजापति शामिल हैं।
इस मंत्र के नियमित जप से:
जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं
घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है
देवताओं की कृपा से रक्षा होती है
मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है
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सरल अर्थ (Summary Meaning):
ॐ नमो त्रयस्त्रिंशत् कोटि देवताभ्यः।
मैं 33 प्रकार के सभी देवताओं को नमस्कार करता हूँ।
नमो वसुभ्यः, नमो रुद्रेभ्यः, नमो आदित्येभ्यः।
मैं अष्ट वसु, एकादश रुद्र और द्वादश आदित्य देवताओं को प्रणाम करता हूँ।
नमो इन्द्राय, नमः प्रजापतये।
मैं देवराज इन्द्र और सृष्टि के पालनकर्ता प्रजापति को नमस्कार करता हूँ।
ॐ अनन्ताय, ब्रह्मणे, विष्णवे, महेश्वराय च नमः।
मैं अनंत भगवान, ब्रह्मा जी, भगवान विष्णु और भगवान महेश (शिव) को भी प्रणाम करता हूँ।
सर्वे देवाः मम रक्षणं कुर्युः।
सभी देवता मेरी रक्षा करें।
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये, सर्वपापप्रणाशिनि,
देवतासंयुक्तं स्तोत्रं इदं स्वीकुरु स्वाहा॥
हे मंगलमयी देवी! जो सभी पापों का नाश करने वाली हैं, कृपया इस सभी देवताओं से युक्त स्तोत्र को स्वीकार करें।
ॐ नमो त्रयस्त्रिंशत् कोटि देवताभ्यः।
नमो वसुभ्यः, नमो रुद्रेभ्यः, नमो आदित्येभ्यः।
नमो इन्द्राय, नमः प्रजापतये॥
मैं पुनः 33 कोटि देवताओं, वसु, रुद्र, आदित्य, इन्द्र और प्रजापति को बार-बार नमस्कार करता हूँ।
यह मंत्र सभी देवताओं को एक साथ प्रणाम करने और उनसे रक्षा, कल्याण तथा मंगल की प्रार्थना करने वाला स्तोत्र है।
वैदिक ग्रंथों में 33 देवताओं का वर्णन इस प्रकार मिलता है:
8 वसु
11 रुद्र
12 आदित्य
इन्द्र
प्रजापति
इन सबको मिलाकर कुल 33 देवता होते हैं।
8 वसु (अष्ट वसु)
१. अग्नि
२. पृथ्वी
३. वायु
४. अंतरिक्ष
५. आदित्य (सूर्य)
६. द्यौ (आकाश)
७. चन्द्र
८. नक्षत्र
11 रुद्र
१. हर
२. बहुरूप
३. त्र्यम्बक
४. अपराजित
५. वृषाकपि
६. शम्भु
७. कपर्दी
८. रैवत
९. मृगव्याध
१०. शर्व
११. कपाली
12 आदित्य
१. मित्र
२. वरुण
३. अर्यमन
४. भानु
५. भग
६. पूषा
७. त्वष्टा
८. विवस्वान
९. सविता
१०. अंश
११. धाता
१२. इन्द्र
अन्य दो देवता
३२. इन्द्र
३३. प्रजापति
इस प्रकार शास्त्रों में कुल 33 देवताओं का वर्णन मिलता है। “33 कोटि देवता” का अर्थ 33 प्रकार के देवता है, न कि 33 करोड़ देवता।
सनातन धर्म में 33 कोटि देवताओं का अर्थ 33 प्रकार के देवता होता है।
इनमें वसु, रुद्र, आदित्य, इन्द्र और प्रजापति शामिल हैं, जो सृष्टि के विभिन्न तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह मंत्र सभी देवताओं को एक साथ स्मरण करने का सरल और शक्तिशाली माध्यम है।
यह मंत्र केवल धार्मिक पाठ नहीं है, बल्कि एक ऐसा साधन है जो व्यक्ति को सभी देवताओं की कृपा से जोड़ता है।
यदि आप इसे सही विधि और श्रद्धा से जप करते हैं, तो यह आपके जीवन में शांति, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा ला सकता है।
