॥ श्री शिवरक्षा स्तोत्रम् ॥

॥ विनियोग ॥
श्री गणेशाय नमः॥
अस्य श्रीशिवरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य याज्ञवल्क्य ऋषिः।
श्री सदाशिवो देवता।
अनुष्टुप् छन्दः।
श्रीसदाशिवप्रीत्यर्थं शिवरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः॥
॥ स्तोत्र पाठ ॥
चरितं देवदेवस्य महादेवस्य पावनम्।
अपारं परमोदारं चतुर्वर्गस्य साधनम्॥१॥
गौरीविनायकोपेतं पञ्चवक्त्रं त्रिनेत्रकम्।
शिवं ध्यात्वा दशभुजं शिवरक्षां पठेन्नरः॥२॥
गंगाधरः शिरः पातु भालं अर्धेन्दुशेखरः।
नयने मदनध्वंसी कर्णो सर्पविभूषण॥३॥
घ्राणं पातु पुरारातिः मुखं पातु जगत्पतिः।
जिह्वां वागीश्वरः पातु कंधरां शितिकंधरः॥४॥
श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरन्धरः।
भुजौ भूभारसंहर्ता करौ पातु पिनाकधृक्॥५॥
हृदयं शंकरः पातु जठरं गिरिजापतिः।
नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्राजिनाम्बरः॥६॥
सक्थिनी पातु दीनार्तशरणागतवत्सलः।
उरू महेश्वरः पातु जानुनी जगदीश्वरः॥७॥
जङ्घे पातु जगत्कर्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः।
चरणौ करुणासिन्धुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः॥८॥
एतां शिवबलोपेतां रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स भुक्त्वा सकलान्कामान् शिवसायुज्यमाप्नुयात्॥९॥
ग्रहभूतपिशाचाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये।
दूरादाशु पलायन्ते शिवनामाभिरक्षणात्॥१०॥
अभयङ्करनामेदं कवचं पार्वतीपतेः।
भक्त्या बिभर्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत्त्रयम्॥११॥
इमां नारायणः स्वप्ने शिवरक्षां यथाऽऽदिशत्।
प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यः तथाऽलिखत॥१२॥
॥ इति श्रीयाज्ञवल्क्यप्रोक्तं शिवरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
शिवरक्षा स्तोत्र का महत्व: शिवरक्षा स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली कवच स्तोत्र है। इसका पाठ करने से भगवान शिव की पूर्ण रक्षा, कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह स्तोत्र नकारात्मक शक्तियों, भय, ग्रह-दोष और मानसिक अशांति से रक्षा करता है।
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सरल अर्थ (Summary Meaning)
शिवरक्षा स्तोत्र का सरल अर्थ (संक्षेप)
इस शिवरक्षा स्तोत्र में भगवान शिव के विभिन्न रूपों से प्रार्थना की गई है कि वे:
- सिर से लेकर चरणों तक
- शरीर के हर अंग की रक्षा करें
- भक्त को भय, रोग, शत्रु और बुरी शक्तियों से सुरक्षित रखें
यह स्तोत्र पूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में माना जाता है।
शिवरक्षा स्तोत्रस्तोत्र नियमित रूप से पाठ करने से लाभ (Benefits):
- नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- भय और मानसिक तनाव से मुक्ति
- ग्रह-दोष और बाधाओं में शांति
- आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि
- शिव कृपा से जीवन में स्थिरता
