॥ श्री दुर्गाष्टकम् ॥

श्री दुर्गाष्टकम् माता दुर्गा को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। यह स्तुति भक्त को भय, रोग, संकट और कष्टों से मुक्त करती है। नियमित रूप से दुर्गाष्टकम् पाठ करने से मन शुद्ध होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह स्तोत्र माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की स्तुति करता है और उनकी दिव्य शक्तियों का वर्णन करता है।
श्री दुर्गाष्टकम्
कात्यायनि महामायेखड्गबाणधनुर्धरे।
खड्गधारिणि चण्डिदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥1॥
वसुदेवसुते कालिवासुदेवसहोदरि।
वसुन्धराश्रिये नन्देदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥2॥
योगनिद्रे महानिद्रेयोगमाये महेश्वरि।
योगसिद्धिकरी शुद्धेदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥3॥
शङ्खचक्रगदापाणेशार्ङ्गज्यायतबाहवे।
पीताम्बरधरे धन्येदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥4॥
ऋग्यजुस्सामाथर्वाणश्चतुस्सामन्तलोकिनि।
ब्रह्मस्वरूपिणि ब्राह्मिदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥5॥
वृष्णीनां कुलसम्भूतेविष्णुनाथसहोदरि।
वृष्णिरूपधरे धन्येदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥6॥
सर्वज्ञे सर्वगे शर्वेसर्वेशे सर्वसाक्षिणि।
सर्वामृतजटाभारेदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥7॥
अष्टबाहु महासत्त्वेअष्टमी नवमि प्रिये।
अट्टहासप्रिये भद्रेदुर्गादेवि नमोऽस्तु ते॥8॥
दुर्गाष्टकमिदं पुण्यंभक्तितो यः पठेन्नरः।
सर्वकाममवाप्नोतिदुर्गालोकं स गच्छति॥9॥
॥ इति श्रीदुर्गाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
श्री दुर्गाष्टकम् का महत्व (महत्व)
- यह स्तोत्र नवरात्रि में विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
- मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है।
- भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
- आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
- सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करता है।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति भक्ति भाव से श्री दुर्गाष्टकम् का पाठ करता है, वह अंततः माँ दुर्गा के लोक को प्राप्त करता है।
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श्री दुर्गाष्टकम् – सरल अर्थ
श्री दुर्गाष्टकम् – सरल अर्थ
श्लोक 1 का अर्थ
हे कात्यायनी, महामाया, खड्ग और धनुष धारण करने वाली चण्डिका दुर्गा देवी! आपको मेरा नमस्कार है।
श्लोक 2 का अर्थ
हे वसुदेव की पुत्री, काली रूप में स्थित और श्रीकृष्ण की बहन! पृथ्वी को धारण करने वाली देवी, आपको प्रणाम है।
श्लोक 3 का अर्थ
हे योगनिद्रा, महानिद्रा और योगमाया! हे महेश्वरी! आप योग सिद्धि देने वाली और पवित्र स्वरूप वाली हैं। आपको नमस्कार।
श्लोक 4 का अर्थ
हे शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली! पीताम्बर पहनने वाली धन्य देवी! आपको प्रणाम।
श्लोक 5 का अर्थ
हे चारों वेदों की अधिष्ठात्री! ब्रह्म स्वरूपिणी ब्राह्मी देवी! आपको नमस्कार।
श्लोक 6 का अर्थ
हे वृष्णि कुल में उत्पन्न और विष्णु की सहोदरी! वृष्णि रूप धारण करने वाली देवी! आपको प्रणाम।
श्लोक 7 का अर्थ
हे सर्वज्ञ, सर्वव्यापक और सर्वेश्वरी! समस्त जगत की साक्षी माता! आपको नमस्कार।
श्लोक 8 का अर्थ
हे अष्टभुजा वाली, अष्टमी और नवमी की प्रिय देवी! अट्टहास करने वाली भद्रे! आपको प्रणाम।
फलश्रुति (श्लोक 9 का अर्थ)
जो व्यक्ति इस पवित्र दुर्गाष्टकम् पाठ को श्रद्धा से करता है, उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और वह दुर्गा लोक को प्राप्त करता है।
