• भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे” — प्रभु भक्तों के दुख और बाधाएँ तुरंत हर लेते हैं।
  • “जो ध्यावे फल पावे” — जो श्रद्धा से स्मरण करे, उसे इच्छित फल प्राप्त होता है।
  • “मात-पिता तुम मेरे” — प्रभु ही सच्चे आश्रय और रक्षक हैं।
  • “तुम पूरण परमात्मा” — वे सर्वव्यापक, सर्वज्ञ और सबके स्वामी हैं।
  • “विषय-विकार मिटाओ” — प्रभु से कामना है कि वे दोष दूर कर भक्ति बढ़ाएँ।
  • “जो कोई नर गावे… सुख संपत्ति पावे” — श्रद्धापूर्वक गाने वाला सुख-समृद्धि पाता है।

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