• “जय लक्ष्मी-विष्णो” – हे लक्ष्मी और विष्णु भगवान, आपकी जय हो।
  • “जय माधव, जय श्रीपति” – हे श्रीपति (लक्ष्मीपति) प्रभु, आपकी जय हो।
  • “कमल वराभय-हस्ते” – जिनके हाथों में कमल और वर देने का आशीर्वाद है।
  • “गरुड़ासनचारिन्” – जो गरुड़ पर विराजमान हैं।
  • “तुम त्रिभुवन की माता” – आप तीनों लोकों की जननी और पालनकर्ता हैं।
  • “तुम धन जन सुख सन्तति देनेवाली” – आप धन, परिवार और सुख प्रदान करती हैं।
  • “शरणागत हूँ” – मैं आपकी शरण में हूँ, मुझ पर कृपा करें।
  • यह आरती भगवान के सौंदर्य, शांति, करुणा और कृपा का गुणगान करती है।

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