• “जय जय श्री बदरीनाथ जयति योग ध्यानी”
  • — हे योगी स्वरूप प्रभु! आपकी जय हो, आप ध्यान में लीन रहने वाले हैं।
  • “निर्गुण सगुण स्वरूप…”
  • — आप निराकार भी हैं और साकार भी; आपका स्वरूप अद्वितीय है, देवता और ज्ञानी आपके चरणों की सेवा करते हैं।
  • “तिलक भाल अति विशाल…”
  • — आपके ललाट का तिलक, गले की मणि-मुक्ता मालाएँ आपकी दिव्य छवि को और शोभायमान करती हैं; आप शरणागतों के रक्षक हैं।
  • “गावत गुण शम्भु, शेष…”
  • — शिव, शेष, इन्द्र, चन्द्र और सूर्य भी आपके गुणों का गान करते हैं; हम भी हाथ जोड़कर आपकी वंदना करते हैं।
  • (पूरी आरती प्रभु के दिव्य स्वरूप, करुणा और महिमा का स्तवन है।)

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