सरल अर्थ: आरती कीजै श्री रघुवर जी की
भगवान श्रीराम की आरती करें, जो सत्य, चेतना और आनंद के स्वरूप हैं।

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन
वे राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र हैं, जो देवताओं और ऋषियों की रक्षा करते हैं।

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि
भगवान राम निराकार भी हैं और साकार भी, उनका स्वरूप अद्वितीय है।

जानकी पति सुर अधिपति जगपति
वे माता सीता के पति, देवताओं के स्वामी और समस्त जगत के पालनकर्ता हैं।

शरणागत वत्सल व्रतधारी
वे शरण में आने वालों की रक्षा करने वाले और भक्तों के दुःख दूर करने वाले हैं।

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