सरल अर्थ: इस आरती में भक्त अपने मन से भगवान राम की आरती करने का संकल्प करता है।
भक्त कहता है कि भगवान राम सर्वव्यापी हैं और हर जगह विद्यमान हैं। उनके लिए धूप, दीप और नैवेद्य के रूप में अपने मन की शुद्ध भावना अर्पित करनी चाहिए।
ज्ञान का दीपक अज्ञान, क्रोध, अहंकार और मोह के अंधकार को दूर करता है। प्रेम और भक्ति भगवान को अत्यंत प्रिय हैं और वे सभी संदेह और दुखों को समाप्त कर देते हैं।
जब हृदय शुद्ध और शांत हो जाता है, तब भगवान श्रीराम उसमें विश्राम करते हैं और वहां माया या भ्रम का स्थान नहीं रहता।

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