सरल अर्थ: इस आरती में भक्त भगवान श्रीराम को नमस्कार करते हुए उनसे प्रार्थना करता है कि वे उसकी विनती सुनें। भक्त उन्हें अपना पिता-माता और जीवनदाता मानता है।
आरती में भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न की दिव्य छवि का वर्णन किया गया है। माता कौशल्या स्वर्ण थाल में आरती उतार रही हैं और हनुमान जी आनंदपूर्वक भगवान की सेवा कर रहे हैं।
भक्त अंत में कहता है कि प्रभु के दर्शन से उसका जीवन धन्य हो जाता है और वह बार-बार उनके चरणों में नतमस्तक होता है।

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