सरल अर्थ: इस आरती में भक्त माँ दुर्गा को जगत की माता और शक्ति स्वरूप मानकर उनकी स्तुति करते हैं।

  • माँ दुर्गा सभी दुखों और संकटों को दूर करने वाली हैं।
  • वह अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए सिंह पर सवार होकर दुष्टों का नाश करती हैं।
  • माँ का अपने भक्तों के साथ वही पवित्र संबंध है जैसा माँ और बेटे का होता है।
  • भक्त माँ से धन या वैभव नहीं, बल्कि उनके चरणों में स्थान और भक्ति की कृपा माँगते हैं।
  • अंत में भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वे अपने वरद हस्त से सभी संकट दूर करें और भक्ति का आशीर्वाद दें।
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