॥ श्री गायत्री जी की आरती ॥

माता गायत्री को वेदों की जननी और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार गायत्री देवी ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त दिव्य शक्ति का स्वरूप हैं। उनकी आराधना से बुद्धि, ज्ञान, शुद्धता और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
श्री गायत्री जी की आरती श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
॥ श्री गायत्री जी की आरती ॥
ज्ञानदीप और श्रद्धा की बाती।
सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी की॥
आरती श्री गायत्रीजी की।
मानस की शुचि थाल के ऊपर।
देवी की ज्योत जगै, जहं नीकी॥
आरती श्री गायत्रीजी की।
शुद्ध मनोरथ ते जहां घण्टा।
बाजैं करै आसुह ही की॥
आरती श्री गायत्रीजी की।
जाके समक्ष हमें तिहुं लोक कै।
गद्दी मिलै सबहुं लगै फीकी॥
आरती श्री गायत्रीजी की।
संकट आवैं न पास कबौ तिन्हें।
सम्पदा और सुख की बनै लीकी॥
आरती श्री गायत्रीजी की।
आरती प्रेम सौ नेम सो करि।
ध्यावहिं मूरति ब्रह्म लली की॥
आरती श्री गायत्रीजी की।
गायत्री आरती का माहात्म्य: शास्त्रों के अनुसार माता गायत्री ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संयुक्त दिव्य शक्ति मानी जाती हैं। इन्हें वेदमाता भी कहा जाता है क्योंकि चारों वेदों का सार गायत्री में समाहित है। गायत्री आरती का पाठ करने से:
- बुद्धि और ज्ञान की वृद्धि होती है
- जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- आध्यात्मिक जागरण होता है
- घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है
- जो भक्त श्रद्धा और नियम से माता गायत्री की आरती करते हैं, उन्हें देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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तुलसी आरती का सरल अर्थ: इस आरती में माता की महिमा का वर्णन किया गया है।
- इस आरती में माता गायत्री की महिमा का वर्णन किया गया है। इसमें कहा गया है कि ज्ञान का दीपक और श्रद्धा की बाती जलाकर जब भक्ति रूपी घी अर्पित किया जाता है, तब देवी प्रसन्न होती हैं।
- शुद्ध मन से की गई पूजा से देवी की दिव्य ज्योति हृदय में प्रकट होती है और जीवन के संकट दूर हो जाते हैं।
- जो भक्त प्रेम और नियम से माता गायत्री की आरती करता है, उसे तीनों लोकों का सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।
