सरल अर्थ: इस आरती में भक्त माँ कूष्माण्डा से प्रार्थना करता है कि वे संसार को सुख देने वाली हैं और अपने भक्तों पर कृपा करें।

  • भक्त माँ के अनेक दिव्य रूपों और नामों का स्मरण करता है और उनसे अपने जीवन के संकट दूर करने तथा मनोकामनाएँ पूर्ण करने की विनती करता है।
  • आरती के अंत में भक्त विनम्र होकर माँ के चरणों में प्रणाम करता है और उनसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि और कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करता है।
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