सरल अर्थ: श्रीदुर्गा षोडशनामस्तोत्रम् मां दुर्गा के 16 पवित्र नामों का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि देवी के इन नामों का स्मरण करने से शुभ फल और मनचाही सिद्धि प्राप्त होती है।

इस स्तोत्र का पाठ करने से भय दूर होता है, क्योंकि इसमें देवी की रक्षा शक्ति का स्मरण किया गया है।

1.सर्वाख्यानं श्रुतं ब्रह्मन्नतीव परमाद्भुतम्, अधुना श्रोतुमिच्छामि दुर्गोपाख्यानमुत्तमम्॥

अर्थात : हे ब्रह्मन्! मैंने अनेक अद्भुत कथाएँ सुनी हैं, पर अब मैं देवी दुर्गा की श्रेष्ठ कथा सुनना चाहता हूँ।

2.दुर्गा नारायणीशाना विष्णुमाया शिवा सती, नित्या सत्या भगवती शर्वाणी सर्वमङ्गला॥

इसी प्रकार – देवी के ये नाम हैं —
दुर्गा – सभी संकटों से बचाने वाली
नारायणी – भगवान नारायण की शक्ति
ईशाना – समस्त संसार की अधीश्वरी
विष्णुमाया – भगवान विष्णु की दिव्य माया
शिवा – कल्याण करने वाली
सती – सत्य और पवित्रता की प्रतीक
नित्या – जो सदा रहने वाली हैं
सत्या – सत्य स्वरूप देवी
भगवती – सभी ऐश्वर्य से संपन्न देवी
शर्वाणी – भगवान शिव की शक्ति
सर्वमंगला – सबका मंगल करने वाली

3.अम्बिका वैष्णवी गौरी पार्वती च सनातनी, नामानि कौथुमोक्तानि सर्वेषां शुभदानि च॥

अर्थ :देवी के अन्य नाम हैं —
अम्बिका – सबकी माता
वैष्णवी – विष्णु की शक्ति
गौरी – उज्ज्वल और पवित्र स्वरूप वाली
पार्वती – पर्वतराज हिमालय की पुत्री
सनातनी – अनादि और शाश्वत देवी
ये सभी नाम शास्त्रों में बताए गए हैं और सबको शुभ फल देने वाले हैं।

4.अर्थं षोडशनाम्नां च सर्वेषामिप्सितं वरम् , ब्रूहि वेदविदां श्रेष्ठ वेदोक्तं सर्वसम्मतम्॥

इसके फलस्वरूप अर्थ : हे वेदों के श्रेष्ठ ज्ञाता! कृपया इन देवी के सोलह नामों का अर्थ और उनका फल बताइए, जिससे सभी को इच्छित वरदान प्राप्त हो सके।
स्तोत्र का महत्व:- मां दुर्गा के 16 नामों का स्मरण करने से भय, दुख और संकट दूर होते हैं। जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से नवरात्रि में पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है।

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