Ganesh chaturthi 2026 dates सभी व्रत तिथियाँ, चंद्र दर्शन समय और महत्व
संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi 2026)
संकष्टी चतुर्थी 2026 के सभी व्रत की तिथियाँ, चंद्र दर्शन समय और तिथि का पूरा विवरण यहां दिया गया है।
यह व्रत भगवान गणेश जी को समर्पित होता है और हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और चंद्र दर्शन के बाद पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
यहां आपको 2026 में आने वाली सभी संकष्टी चतुर्थी की तिथियाँ, चंद्र उदय समय और व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से मिलेगी।
संकष्टी चतुर्थी 2026 (विक्रम संवत 2082–2083)
| महीना | व्रत नाम | तारीख / दिन | चंद्र दर्शन | तिथि प्रारम्भ | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|---|---|
| जनवरी | लम्बोदर संकष्टी (सकट चौथ) | 6 जनवरी 2026, मंगलवार | 08:59 PM | 08:01 AM (6 Jan) | 06:52 AM (7 Jan) |
| फरवरी | द्विजप्रिय संकष्टी | 5 फरवरी 2026, गुरुवार | 09:39 PM | 12:09 AM (5 Feb) | 12:22 AM (6 Feb) |
| मार्च | भालचन्द्र संकष्टी | 6 मार्च 2026, शुक्रवार | 09:18 PM | 05:53 PM (6 Mar) | 07:17 PM (7 Mar) |
| अप्रैल | विकट संकष्टी | 5 अप्रैल 2026, रविवार | 09:58 PM | 11:59 AM (5 Apr) | 02:10 PM (6 Apr) |
| मई | एकदन्त संकष्टी | 5 मई 2026, मंगलवार | 10:35 PM | 05:24 AM (5 May) | 07:51 AM (6 May) |
| जून | विभुवन संकष्टी | 3 जून 2026, बुधवार | 10:04 PM | 09:21 PM (3 Jun) | 11:30 PM (4 Jun) |
| जुलाई | कृष्णपिङ्गल संकष्टी | 3 जुलाई 2026, शुक्रवार | 09:53 PM | 11:20 AM (3 Jul) | 12:39 PM (4 Jul) |
| अगस्त | गजानन संकष्टी | 2 अगस्त 2026, रविवार | 09:24 PM | 11:07 PM (1 Aug) | 11:15 PM (2 Aug) |
| अगस्त | हेरम्ब संकष्टी (बहुला चतुर्थी) | 31 अगस्त 2026, सोमवार | 08:29 PM | 08:50 AM (31 Aug) | 07:41 AM (1 Sep) |
| सितम्बर | विघ्नराज संकष्टी | 29 सितम्बर 2026, मंगलवार | 07:44 PM | 05:09 PM (29 Sep) | 02:55 PM (30 Sep) |
| अक्टूबर | वक्रतुण्ड संकष्टी (करवा चौथ) | 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार | 08:17 PM | 01:06 AM (29 Oct) | 10:09 PM (29 Oct) |
| नवम्बर | गणाधिप संकष्टी | 27 नवम्बर 2026, शुक्रवार | 08:18 PM | 09:48 AM (27 Nov) | 06:39 AM (28 Nov) |
| दिसम्बर | अखुरथ संकष्टी | 26 दिसम्बर 2026, शनिवार | 08:19 PM | 08:04 PM (26 Dec) | 05:12 PM (27 Dec) |
संकष्टी चतुर्थी के नाम अलग होने के मुख्य कारण
मासिक (महीने के अनुसार नाम)
साल में 12 या 13 संकष्टी चतुर्थी होती हैं और हर महीने भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है।
जैसे:
- चैत्र में – विकट संकष्टी
- माघ में – द्विजप्रिय संकष्टी
इसी कारण हर महीने का नाम अलग होता है।
संकष्टी चतुर्थी के नाम अलग होने के मुख्य कारण
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी
जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार (Tuesday) के दिन पड़ती है, तो उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
यह सबसे शुभ मानी जाती है और इसका फल कई गुना अधिक होता है।
क्षेत्रीय (Regional) नाम
भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस व्रत को अलग नामों से जाना जाता है।
जैसे:
- उत्तर भारत में माघ माह की चतुर्थी को
सकट चौथ या तिलकुटा चौथ कहा जाता है।
पौराणिक कथाएं
हर संकष्टी चतुर्थी के साथ एक विशेष कथा जुड़ी होती है, जिसमें भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूपों का वर्णन मिलता है।
इन कथाओं के आधार पर भी व्रत का नाम अलग हो जाता है।
प्रमुख संकष्टी चतुर्थी नाम
- संकष्टी चतुर्थी (सामान्य)
- अंगारकी संकष्टी चतुर्थी
- सकट चौथ / तिलकुटा चौथ
निष्कर्ष
संकष्टी चतुर्थी के अलग-अलग नाम होने का कारण
👉 भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूप,
👉 महीने का अंतर,
👉 विशेष दिन (मंगलवार),
👉 और पौराणिक मान्यताएं हैं।
इन सभी व्रतों का उद्देश्य एक ही है —
जीवन के कष्टों को दूर करना और गणेश जी की कृपा प्राप्त करना।
2. विनायक चतुर्थी (Vinayak Chaturthi 2026)
गणेश (विनायक) चतुर्थी 2026: सभी तिथियाँ, पूजा मुहूर्त और महत्व (विक्रम संवत 2082–2083)
Vinayak Chaturthi 2026 की सभी तिथियाँ और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी यहां दी गई है।
विनायक चतुर्थी हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है और यह भगवान गणेश जी को समर्पित एक विशेष दिन होता है।
इस दिन गणपति बप्पा की पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने से बुद्धि, सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
नीचे 2026 की सभी विनायक चतुर्थी तिथियाँ विस्तार से दी गई हैं।
यह पावन दिन जीवन में नए कार्यों की शुरुआत,
सफलता और विघ्नों को दूर करने के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
कहते हैं कि जो भक्त इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करता है,
उसके सभी कार्य बिना बाधा के पूर्ण होते हैं।
यहां जानिए 2026 में आने वाली सभी विनायक चतुर्थी की तिथियाँ और उनका महत्व।
गणेश (विनायक) चतुर्थी 2026 (विक्रम संवत 2082–2083)
| महीना | व्रत नाम | तारीख / दिन | पूजा मुहूर्त | तिथि प्रारम्भ | तिथि समाप्त |
|---|---|---|---|---|---|
| जनवरी | गणेश जयंती (गौरी गणेश) | 22 जनवरी 2026, गुरुवार | 11:39 AM – 01:54 PM | 02:47 AM (22 Jan) | 02:28 AM (23 Jan) |
| फरवरी | ढुण्ढिराज चतुर्थी | 21 फरवरी 2026, शनिवार | 11:38 AM – 01:00 PM | 02:38 PM (20 Feb) | 01:00 PM (21 Feb) |
| मार्च | वासुदेव चतुर्थी | 22 मार्च 2026, रविवार | 11:29 AM – 01:54 PM | 11:56 PM (21 Mar) | 09:16 PM (22 Mar) |
| अप्रैल | संकर्षण चतुर्थी | 20 अप्रैल 2026, सोमवार | 11:18 AM – 01:49 PM | 07:27 AM (20 Apr) | 04:14 AM (21 Apr) |
| मई | वरदा चतुर्थी | 19 मई 2026, मंगलवार | 11:13 AM – 01:49 PM | 02:18 PM (19 May) | 11:06 AM (20 May) |
| जून | प्रद्युम्न चतुर्थी | 18 जून 2026, गुरुवार | 11:16 AM – 01:55 PM | 09:38 PM (17 Jun) | 06:58 PM (18 Jun) |
| जुलाई | अनिरुद्ध चतुर्थी | 17 जुलाई 2026, शुक्रवार | 11:22 AM – 01:59 PM | 06:27 AM (17 Jul) | 04:42 AM (18 Jul) |
| अगस्त | दूर्वा गणपति चतुर्थी | 16 अगस्त 2026, रविवार | 11:22 AM – 01:55 PM | 05:28 PM (15 Aug) | 04:52 PM (16 Aug) |
| सितम्बर | गणेश चतुर्थी (सिद्धिविनायक) | 14 सितम्बर 2026, सोमवार | 11:16 AM – 01:44 PM | 07:06 AM (14 Sep) | 07:44 AM (15 Sep) |
| अक्टूबर | कपर्दिश चतुर्थी | 14 अक्टूबर 2026, बुधवार | 11:10 AM – 01:31 PM | 11:27 PM (13 Oct) | 01:13 AM (15 Oct) |
| नवम्बर | लाभ चतुर्थी | 13 नवम्बर 2026, शुक्रवार | 11:11 AM – 01:26 PM | 06:09 PM (12 Nov) | 08:42 PM (13 Nov) |
| दिसम्बर | कृच्छ्र चतुर्थी | 13 दिसम्बर 2026, रविवार | 11:23 AM – 01:35 PM | 02:06 PM (12 Dec) | 04:47 PM (13 Dec) |
विनायक चतुर्थी के नाम अलग-अलग क्यों होते हैं?
विनायक चतुर्थी (या गणेश चतुर्थी) के अलग-अलग नाम होने के पीछे धार्मिक, पौराणिक और क्षेत्रीय कारण जुड़े हुए हैं। भगवान गणेश जी के विभिन्न स्वरूप, चंद्र पक्ष (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) तथा अलग-अलग परंपराओं के कारण इस व्रत को कई नामों से जाना जाता है।
1. पक्ष (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) के अनुसार
हिंदू पंचांग के अनुसार:
- शुक्ल पक्ष की चतुर्थी – विनायक चतुर्थी कहलाती है
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी – संकष्टी चतुर्थी कहलाती है
– संकष्टी का अर्थ होता है संकट दूर करने वाली, इसलिए यह व्रत कष्ट निवारण के लिए किया जाता है।
2. भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूप
भगवान गणेश जी के कई नाम और रूप हैं, और हर महीने की चतुर्थी उनके अलग स्वरूप को समर्पित होती है:
- विनायक – सभी नायकों के नायक, प्रथम पूज्य
- गजानन – हाथी के मुख वाले
- लंबोदर – बड़े पेट वाले (समृद्धि का प्रतीक)
- सिद्धि विनायक – सफलता और मनोकामना पूर्ण करने वाले
– इसी कारण हर चतुर्थी का नाम अलग-अलग होता है।
3. क्षेत्रीय परंपराओं का प्रभाव
भारत के अलग-अलग राज्यों में इस व्रत को अलग नामों से जाना जाता है:
- महाराष्ट्र – गणेश चतुर्थी / गणेशोत्सव
- दक्षिण भारत –विनायक चविथि
- उत्तर भारत – विनायक चतुर्थी / गणेश व्रत
4. पौराणिक कथा के अनुसार नाम
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया, तब उन्हें सभी देवताओं ने प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया।
- उसी समय से उन्हें गणेश, गजानन और विनायक जैसे नामों से जाना जाने लगा।
- विनायक का अर्थ है — सर्वश्रेष्ठ नेता या सभी का मार्गदर्शक
निष्कर्ष:- इस प्रकार विनायक चतुर्थी के अलग-अलग नाम
- चंद्र पक्ष
- गणेश जी के विभिन्न रूप
- क्षेत्रीय परंपराएं
- और पौराणिक मान्यताओं
इन सभी कारणों से होते हैं।
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