सरल अर्थ: इस आरती में भक्त माता की स्तुति करते हुए कहते हैं कि —

  • ॐ जय गंगे माता
  • हे गंगा माता! आपकी जय हो, जो भी आपका ध्यान करता है उसकी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
  • चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी
  • आपका जल चंद्रमा की तरह शीतल और उज्ज्वल है, जो आपकी शरण में आता है वह जीवन सागर से पार हो जाता है।
  • पुत्र सगर के तारे
  • आपने राजा सगर के पुत्रों का उद्धार किया, इसलिए पूरी दुनिया आपकी महिमा जानती है।
  • एक बार जो प्राणी शरण तेरी आता
  • जो व्यक्ति आपकी शरण में आता है, वह यम के भय से मुक्त होकर परम गति प्राप्त करता है।
  • आरती मातु तुम्हारी जो नर नित गाता
  • जो भक्त प्रतिदिन आपकी आरती गाता है, उसे सहज ही मुक्ति और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
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