॥ भगवान शंकर आरती ॥
शिव ध्यान मंत्र: श्री शिव शंकर जी की आरती से पहले पढ़ें:
ॐ ध्यानं शिवं शान्तमद्वैतमखिलं शिवम्।
शिवोऽहं शिवोऽहं शिवोऽहं शिवोऽहम्॥
॥ भगवान शंकर आरती ॥
जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी।
जयति जयति जग-निवास, शंकर सुखकारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
अजर अमर अज अरूप, सत्-चित्-आनन्दरूप।
व्यापक ब्रह्मस्वरूप, भव! भव-भय-हारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
शोभित बिधुबाल भाल, सुरसरि-मय जटाजाल।
तीन नयन अति विशाल, मदन-दहन-कारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
भक्त-हेतु धरत शूल, करत कठिन शूल फूल।
हिय की सब हरत हूक, अचल शान्तिकारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
अमल अरुण चरण-कमल, सफल करत काम सकल।
भक्ति-मुक्ति देत विमल, माया-भ्रम-टारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
कार्तिकेय युत गणेश, हिमतनया सह महेश।
राजत कैलास-देश, अकल कलाधारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
भूषण तन भूति व्याल, मुण्डमाल कर कपाल।
सिंहचर्म हस्ति-खाल, डमरू करधारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
अशरण जन नित्य शरण, आशुतोष आर्ति-हरण।
सब विधि कल्याण-करण, जय जय त्रिपुरारी॥
जयति जयति जग-निवास…॥
आरती का माहात्म्य:
- वे भक्तों के कष्ट हरने वाले और मोक्ष देने वाले हैं।
- वे अजर, अमर और ब्रह्मस्वरूप हैं।
- वे त्रिनेत्रधारी, गंगाधर और चंद्रशेखर हैं।
सरल अर्थ (Summary Meaning)
यह आरती बताती है कि शिव सत्य और सनातन हैं—न जन्म, न विनाश। वे त्रिमूर्ति रूप में सृष्टि के कर्ता, पालक और संहारक हैं। वे योगी होकर भी करुणामय हैं, श्मशानवासी होकर भी कल्याणकारी हैं। उनके रुद्र रूप में प्रलय है तो सौम्य रूप में शांति। अंत में भक्त दया, शरण और निर्मल बुद्धि की प्रार्थना करता है
लाभ (Benefits): नियमित रूप से आरती करने से:
- भय और संकट दूर होते हैं
- मानसिक शांति मिलती है
- भक्ति और मुक्ति की प्राप्ति होती है
- ग्रह दोष और बाधाएँ शांत होती हैं

