सरल अर्थ: इस आरती में माँ शैलपुत्री की महिमा का वर्णन किया गया है।

जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता, जय चतुरानन प्रिय सुखदाता
हे माँ ब्रह्मचारिणी! आपकी जय हो। आप ब्रह्मा जी को भी प्रिय हैं और सभी को सुख देने वाली हैं।

ब्रह्मा जी के मन भाती हो, ज्ञान सभी को सिखलाती हो
आप ब्रह्मा जी को प्रिय हैं और संसार को ज्ञान का मार्ग दिखाती हैं।

ब्रह्म मंत्र है जाप तुम्हारा, जिसको जपे सरल संसारा
जो भक्त आपके मंत्र का जप करता है उसका जीवन सरल और सुखमय हो जाता है।

जय गायत्री वेद की माता, जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता
आप वेदों की जननी और गायत्री स्वरूपा हैं। जो भक्त आपको स्मरण करता है उसे कृपा मिलती है।

कमी कोई रहने ना पाए, कोई भी दुख सहने न पाए
आपकी कृपा से भक्तों के जीवन में कोई कमी नहीं रहती और दुख दूर हो जाते हैं।

रुद्राक्ष की माला लेकर, जपे जो मंत्र श्रद्धा देकर
जो भक्त श्रद्धा से रुद्राक्ष की माला से मंत्र जप करता है उसे विशेष फल मिलता है।

आलस छोड़ करे गुणगाना, माँ तुम उसको सुख पहुँचाना
जो भक्त आलस्य छोड़कर आपका गुणगान करता है, उसे आप सुख और शांति देती हैं।

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