गणेश

Ganesha for You & Your Family

न विघ्न, न भय — जहाँ गणेश हैं, वहाँ मंगल ही मंगल है।
गणेश केवल एक देवता नहीं, बल्कि हर शुभ आरंभ की दिव्य ऊर्जा हैं। भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, सफलता और संरक्षण के शाश्वत प्रतीक हैं।
गणेश शब्द नहीं, विश्वास हैं — वे प्रारंभ भी हैं, पूर्णता भी… और दोनों के बीच वह आशीर्वाद भी, वे विघ्नहर्ता हैं, पर साथ ही मार्गदर्शक भी। भगवान
गणेश सरल हैं, स्नेहमय हैं, और शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं। उन्हें न भव्यता चाहिए, न दिखावा —
केवल एक दूर्वा, एक मोदक और सच्चे मन की प्रार्थना ही पर्याप्त है।

श्री गणेश – संग्रह 

विघ्नहर्ता, सिद्धिविनायक और मंगलमूर्ति भगवान श्री गणेश की दिव्य कृपा को समर्पित यह पावन संग्रह भक्तों के लिए अष्टकम, स्तुति, आरती, चालीसा, मंत्र, व्रत विधि तथा गणेश चतुर्थी से जुड़े पवित्र पाठों को एक स्थान पर प्रस्तुत करता है। इस संग्रह का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सरल, शुद्ध और सात्विक भक्ति के माध्यम से गणपति बप्पा से जोड़ना, जीवन की बाधाओं को दूर करना, बुद्धि और विवेक की वृद्धि करना तथा घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखना है।

श्री गणेश चालीसा (Shri Ganesh Chalisa)

श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti)

श्री गणेश स्तोत्रम् (Shri Ganesh Stotram)

ऋणहर्ता श्री गणेश स्तोत्रम्

कैलाशपर्वते रम्ये शम्भुं
Kailash Parvate Ramye

ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्रम्

ॐ अस्य श्रीऋणविमोचनमहा
Om Asya Shri Rin

श्री सङ्कटनाशन गणेश स्तोत्रम्

प्रणम्य शिरसा देवंगौरीपुत्रं
Pranamya Shirasaa Devam

श्री गणपत्यथर्वशीर्षम् स्तोत्रम्

ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयामदेवाः
Om Bhadram Karnebhih

श्री सिद्धिविनायक अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

विनायको विघ्नराजो गौरीपुत्रो गणेश्वरः
Vinayako Vighnarajo Gauriputro

श्री गणेश नामावली (Naamavali)

गणेश द्वादश नामावली

गणेश 12 नाम
Ganesh Dwadash Naamavali

गणेश एक विंशति नामावली

गणेश 21 नाम
Ganesh Ekvinshati Naamavali

गणेश द्वात्रिंश नामावली

गणेश 32 नाम
Ganesh Dvatrinsh Naamavali

श्री गणेश अष्टकम

भगवान गणेश

भगवान गणेश

वे विघ्नहर्ता हैं, पर विघ्न केवल बाहरी नहीं होते — मन के संशय, अहंकार, भय और भ्रम भी विघ्न ही हैं। गणेश उन अदृश्य गांठों को खोलते हैं, जो आत्मा को आगे बढ़ने से रोकती हैं।

उनका विशाल मस्तक ब्रह्मज्ञान का प्रतीक है।
उनकी सूंड लचीलेपन और अनुकूलन की शक्ति है।
विघ्नहर्ता का एकदंत त्याग और एकाग्रता का संदेश देता है।
सिद्धिविनायक का वाहन मूषक यह सिखाता है कि चंचल मन भी जब समर्पित हो जाए, तो वह ईश्वर का बन सकता है।
बड़े कान यह सिखाते हैं कि अधिक सुनो, कम बोलो।
छोटी आँखें एकाग्रता का संदेश देती हैं।

हिंदू धर्म में प्रथम पूज्य देवता हैं भगवान गणेश, किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ, पूजा या नई शुरुआत से पहले उनका स्मरण किया जाता है, क्योंकि वे विघ्नों का नाश करने वाले और सफलता का मार्ग प्रशस्त करने वाले हैं।

गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है?

गणेश आस्था हैं… आरंभ हैं…गणेश ही हर शुभ कर्म का दिव्य प्रारंभ हैं।

भगवान गणेश की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि वे बुद्धि, विवेक और शुभारंभ के देवता हैं। वे विघ्नहर्ता हैं — अर्थात जीवन में आने वाली बाधाओं और कठिनाइयों को दूर करने वाले माने जाते हैं। सच्चे मन से की गई प्रार्थना से गणेश जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सफलता और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

मंगलमूर्ति गणेश जी की पूजा केवल कार्य सिद्धि या सफलता पाने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में समझदारी, धैर्य और सही निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त करने के लिए भी की जाती है।

श्री गणेश जी की दिव्य कृपा

वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ —

विघ्नों का संहार – जीवन की बाधाएँ, रुकावटें और असफलताएँ गणपति की कृपा से दूर होती हैं।
बुद्धि और ज्ञान के दाता – वे “बुद्धिप्रदाता” हैं, जो सही निर्णय और विवेक की शक्ति देते हैं।
संकट से रक्षा – भय, भ्रम और नकारात्मक शक्तियाँ गणेश नाम के प्रभाव से नष्ट हो जाती हैं।
सिद्धि और समृद्धि के स्वामी – सिद्धिविनायक अपने भक्तों को यश, सम्मान और उन्नति प्रदान करते हैं।
परिवार में मंगल और शांति – जहाँ गणेश का वास होता है, वहाँ सुख, सौभाग्य और समृद्धि स्थायी होती है।
आत्मबल और विश्वास – गणेश भक्ति से आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्रद्धा और मनोकामना के अनुसार

नियमित पाठ ईश्वर की कृपा

श्रद्धा से किया गया गणेश स्मरण मन को स्थिर करता है, बुद्धि को प्रखर बनाता है और जीवन के मार्ग से बाधाओं को दूर करता है।

हर नया कार्य सफल होता है भगवान गणेश की कृपा से , हर कठिनाई सरल बनती है और जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है।

ॐ गं गणपतये नमः यह मंत्र विघ्नों को दूर करने और सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

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