अष्टकम्

अष्टकम् केवल शब्द नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और आत्मिक शांति का माध्यम हैं।

शास्त्रों के अनुसार, अष्टकम संस्कृत में रचित भक्ति स्तुति का एक विशेष रूप है, जिसमें सामान्यतः आठ श्लोक (श्लोकों का समूह) होते हैं। “अष्ट” का अर्थ आठ होता है, इसलिए जिस स्तुति में आठ श्लोक होते हैं उसे अष्टकम कहा जाता है। हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं की महिमा का वर्णन करने के लिए अष्टकम की रचना की गई है।

अष्टकम्

अष्टकम् संग्रह उन दिव्य स्तोत्रों का पावन संकलन है जो भक्तों को ईश्वर से जोड़ते हैं और जीवन में शांति, शक्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करते हैं। श्री राम अष्टकम, शिव अष्टकम, लक्ष्मी अष्टकम, दुर्गा अष्टकम, कृष्ण अष्टकम, सरस्वती अष्टकम जैसे अनेक प्रसिद्ध अष्टकम उनके संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और लाभ के साथ मिलेंगे।

कात्यायनि महामायेखड्गबाणधनुर्धरे।

न तातो न माता न बन्धुर्न दातान पुत्रो

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।

महामते महाप्राज्ञसर्वशास्त्रविशारद

अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्य महादेव ऋषिः

गलद्रक्तमुण्डावलीकण्ठमालामहोघोररावा

भगवति तव तीरे नीरमात्राशनोऽहं

मुरारिकायकालिमाललामवारिधारिणीतृणी

तं गणेशं नमामो भजामः

भज गौरीशं भज गौरीशं

तस्मै नमः परमकारणकारणाय

प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं

मनोबुद्ध्यहङ्कारचित्तानि नाहं

गङ्गातरङ्गरमणीयजटाकलापं गौरी

नमामीशमीशाननिर्वाणरूपं

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मल

प्रणतभक्तजनार्तिहरं परं भजत

शिव हरे विजयं कुरू मे वरम्

श्यामाम्बुदाभमरविन्दविशालनेत्रंबन्धू

कृतार्तदेववन्दनंदिनेशवंशनन्दनम्

चिदाकारो धातापरमसुखदः पावन

देवकी परमानन्दंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्

अधरं मधुरं वदनं मधुरंनयनं

सत्यं ज्ञानमनन्तं नित्यमनाकाशं

अच्युतं केशवं रामनारायणंकृष्ण

सुन्दरगोपालम् उरवनमालंनयन

आर्तत्राणपरायणः स भगवान्

अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं

अशेषजगदाधारं लक्ष्मीनारायणं

भुजगतल्पगतं घनसुन्दरंगरुड

अच्युतं केशवं रामनारायणंकृष्ण

तस्मात्त्वमेव शरणं मम

शिवरहस्यान्तर्गते महादेवाख्ये

यस्य हस्ते कुठारं महातीक्ष्णकं

सुन्दरजामातृमुनेः प्रपद्ये

बाल समय रवि भक्षि लियो

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद

नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूति

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