बाँकेबिहारी जी की आरती

सरल अर्थ (Summary Meaning)

इस आरती में भक्त भगवान बाँकेबिहारी की महिमा गाते हुए कहते हैं कि मैं आपकी आरती गाकर आपको रिझाना चाहता हूँ। आपके सिर पर मोर मुकुट शोभित है और आपकी बंशी मन को मोह लेती है। आपके चरणों से निकली गंगा ने संसार को पवित्र किया है। आप दीन-दुखियों के नाथ हैं और जीवन के हर सुख-दुःख में साथ देते हैं। हे श्रीहरिदास के प्रिय और मेरे मोहन, आपकी युगल छवि देखकर मैं बार-बार आप पर बलिहारी जाता हूँ।

वृंदावन में विराजमान ठाकुर श्री बाँकेबिहारी जी, भगवान श्रीकृष्ण का अति मनोहर और मधुर रूप हैं। उनकी आरती गाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम-भक्ति का भावपूर्ण उत्सव है। “श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ” आरती में उनके श्यामसुंदर स्वरूप, बंशी की मधुरता और करुणा का वर्णन है, जो भक्त के मन को आनंद और शांति से भर देता है।

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