॥ श्री महाकाली माता जी की आरती ॥

श्री महाकाली माता शक्ति का उग्र और करुणामय स्वरूप हैं। देवी काली को संकट नाशिनी, दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षक माना जाता है। “मंगल की सेवा सुन मेरी देवा” आरती महाकाली की प्रसिद्ध आरतियों में से एक है, जिसे भक्त श्रद्धा और भक्ति से गाते हैं।
इस आरती का गान करने से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, भय नष्ट होता है और माता की कृपा से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
॥ श्री महाकाली माता जी की आरती – मंगल की सेवा ॥
‘मंगल’ की सेवा, सुन मेरी देवाहाथ जोड़, तेरे द्वार खड़े।
पान सुपारी, ध्वजा, नारियल,ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
सुन जगदम्बे, कर न विलम्बेसंतन के भण्डार भरे।
संतन-प्रतिपाली, सदा खुशहाली,मैया जै काली कल्याण करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
बुद्धि विधाता, तू जग माता,मेरा कारज सिद्ध करे।
चरण कमल का लिया आसरा,शरण तुम्हारी आन परे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
जब-जब भीर पड़ी भक्तन पर,तब-तब आय सहाय करे।
बार-बार तैं सब जग मोहयो,तरुणी रूप अनूप धरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
माता होकर पुत्र खिलावेकहीं भार्या भोग करे।
सन्तन सुखदाई सदा सहाई,सन्त खड़े जयकार करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
ब्रह्मा विष्णु महेश सहसफण लिए,भेंट देन तेरे द्वार खड़े।
अटल सिहांसन बैठी मेरी माता,सिर सोने का छत्र फिरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
वार शनिश्चर कुंकुम बरणो,जब लुँकड़ पर हुकुम करे।
खड्ग खप्पर त्रिशुल हाथ लिए,रक्त बीज को भस्म करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
शुंभ निशुंभ को क्षण में मारे,महिषासुर को पकड़ दले।
‘आदित’ वारी आदि भवानी,जन अपने का कष्ट हरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
कुपित होय दानव मारे,चण्ड मुण्ड सब चूर करे।
जब तुम देखी दया रूप हो,पल में संकट दूर करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
सौम्य स्वभाव धरयो मेरी माता,जन की अर्ज कबूल करे।
सात बार की महिमा बरनी,सब गुण कौन बखान करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
सिंह पीठ पर चढ़ी भवानी,अटल भवन में राज करे।
दर्शन पावें मंगल गावें,सिद्ध साधक तेरी भेंट धरे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे,शिव शंकर ध्यान धरे।
इन्द्र कृष्ण तेरी करे आरती,चँवर कुबेर डुलाय रहे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
जय जननी जय मातु भवानी,अटल भवन में राज करे।
संतन प्रतिपाली सदा खुशहाली,मैया जय काली कल्याण करे॥
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा।
महाकाली आरती जी की आरती का माहात्म्य:
- महाकाली माता की आरती का पाठ करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।
- शास्त्रों के अनुसार माता काली दुष्ट शक्तियों का नाश करती हैं और अपने भक्तों को संकटों से बचाती हैं।
- इस आरती में देवी की महिमा, उनकी शक्ति और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का वर्णन किया गया है। जो भक्त नियमित रूप से इस आरती का पाठ करते हैं, उनके जीवन से भय, बाधा और नकारात्मकता दूर होती है।
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महाकाली आरती का सरल अर्थ:
- इस आरती में भक्त माता काली से प्रार्थना करता है कि वह उसकी सेवा स्वीकार करें और उसके जीवन के संकटों को दूर करें।
- भक्त माता के चरणों में पान, सुपारी, नारियल और ध्वजा अर्पित करके उनसे कृपा की याचना करता है।
- आरती में माता काली के वीर रूप का वर्णन है, जिसमें उन्होंने शुंभ-निशुंभ, महिषासुर और रक्तबीज जैसे असुरों का संहार किया।
- साथ ही यह भी बताया गया है कि माता अपने भक्तों के लिए अत्यंत करुणामयी हैं और संकट के समय तुरंत सहायता करती हैं।
