॥ आरती श्री जगदीशजी ॥

ॐ जय जगदीश हरे भगवान विष्णु/नारायण की अत्यंत लोकप्रिय आरती है, जो संध्या समय घरों और मंदिरों में श्रद्धापूर्वक गाई जाती है। इस आरती के गान से भक्तों के संकट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
॥ आरती श्री जगदीशजी ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
आरती श्री जगदीशजी का माहात्म्य:
- भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति और परिवार की रक्षा हेतु अत्यंत फलदायी।
- संध्या आरती में गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और मंगल वातावरण बनता है।
- नियमित गान से मनोकामनाएँ पूर्ण होने और कष्टों के क्षय की मान्यता।
- व्रत-उत्सव, एकादशी, जन्मदिन/विवाह वर्षगाँठ जैसे अवसरों पर विशेष शुभ।
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सरल अर्थ:
- भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे” — प्रभु भक्तों के दुख और बाधाएँ तुरंत हर लेते हैं।
- “जो ध्यावे फल पावे” — जो श्रद्धा से स्मरण करे, उसे इच्छित फल प्राप्त होता है।
- “मात-पिता तुम मेरे” — प्रभु ही सच्चे आश्रय और रक्षक हैं।
- “तुम पूरण परमात्मा” — वे सर्वव्यापक, सर्वज्ञ और सबके स्वामी हैं।
- “विषय-विकार मिटाओ” — प्रभु से कामना है कि वे दोष दूर कर भक्ति बढ़ाएँ।
- “जो कोई नर गावे… सुख संपत्ति पावे” — श्रद्धापूर्वक गाने वाला सुख-समृद्धि पाता है।
