॥ आरती श्री सरस्वती जी ॥

माँ सरस्वती ज्ञान, बुद्धि, कला और विद्या की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। उन्हें वाणी की देवी भी कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णन है कि माँ सरस्वती की आरती और स्तुति करने से अज्ञान का अंधकार दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है।
“जय सरस्वती माता” आरती देवी सरस्वती की महिमा का सुंदर वर्णन करती है। इस आरती का पाठ करने से बुद्धि, विद्या और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से विद्यार्थी, कलाकार और साधक इस आरती का पाठ करते हैं।
॥ आरती श्री सरस्वती जी ॥
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
जय सरस्वती माता॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
जय सरस्वती माता॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
जय सरस्वती माता॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
जय सरस्वती माता॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
जय सरस्वती माता॥
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारीज्ञान भक्ति पावे॥
जय सरस्वती माता॥
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय सरस्वती माता॥
आरती का माहात्म्य:
- माँ सरस्वती की आरती का पाठ करने से व्यक्ति को ज्ञान, विवेक और स्मरण शक्ति की प्राप्ति होती है। यह आरती अज्ञान और भ्रम को दूर कर मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है।
- बसंत पंचमी, परीक्षा के समय, अध्ययन आरंभ करते समय और किसी भी विद्या से जुड़े कार्य से पहले यह आरती करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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सरल अर्थ:
- इस आरती में देवी सरस्वती की स्तुति करते हुए कहा गया है कि वे सद्गुणों और वैभव से परिपूर्ण हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं। उनका मुख चंद्रमा के समान सुंदर है और वे कमल के आसन पर विराजमान हैं।
- उनके हाथों में वीणा और माला है, जो ज्ञान और साधना का प्रतीक है। देवी अपने भक्तों को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती हैं तथा अज्ञान और अंधकार को दूर करती हैं।
- भक्त उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे ज्ञानचक्षु प्रदान करें और संसार के दुखों से मुक्ति दिलाएँ।
