सरल अर्थ:

  • इस आरती में देवी सरस्वती की स्तुति करते हुए कहा गया है कि वे सद्गुणों और वैभव से परिपूर्ण हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं। उनका मुख चंद्रमा के समान सुंदर है और वे कमल के आसन पर विराजमान हैं।
  • उनके हाथों में वीणा और माला है, जो ज्ञान और साधना का प्रतीक है। देवी अपने भक्तों को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती हैं तथा अज्ञान और अंधकार को दूर करती हैं।
  • भक्त उनसे प्रार्थना करते हैं कि वे ज्ञानचक्षु प्रदान करें और संसार के दुखों से मुक्ति दिलाएँ।
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