श्री शनिदेव चालीसा
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श्री शनिदेव न्याय के देवता और कर्मफल के दाता माने जाते हैं। वे सूर्यदेव के पुत्र तथा छाया माता के पुत्र हैं। शनि देव प्रत्येक प्राणी को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं और जीवन में अनुशासन, धैर्य तथा संयम का महत्व सिखाते हैं। शनि देव की उपासना विशेष रूप से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या तथा जीवन के कठिन समय में अत्यंत फलदायी मानी जाती है
॥ दोहा ॥
श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर।
कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥
॥ सोरठा ॥
तव स्तुति हे नाथ,जोरि जुगल कर करत हौं।
करिये मोहि सनाथ,विघ्नहरन हे रवि सुव्रन।
॥ चौपाई ॥
शनिदेव मैं सुमिरौं तोही।विद्या बुद्धि ज्ञान दो मोही॥
तुम्हरो नाम अनेक बखानौं।क्षुद्रबुद्धि मैं जो कुछ जानौं॥
अन्तक, कोण, रौद्रय मनाऊँ।कृष्ण बभ्रु शनि सबहिं सुनाऊँ॥
पिंगल मन्दसौरि सुख दाता।हित अनहित सब जग के ज्ञाता॥
नित जपै जो नाम तुम्हारा।करहु व्याधि दुःख से निस्तारा॥
राशि विषमवस असुरन सुरनर।पन्नग शेष सहित विद्याधर॥
राजा रंक रहहिं जो नीको।पशु पक्षी वनचर सबही को॥
कानन किला शिविर सेनाकर।नाश करत सब ग्राम्य नगर भर॥
डालत विघ्न सबहि के सुख में।व्याकुल होहिं पड़े सब दुःख में॥
नाथ विनय तुमसे यह मेरी।करिये मोपर दया घनेरी॥
मम हित विषम राशि महँवासा।करिय न नाथ यही मम आसा॥
जो गुड़ उड़द दे बार शनीचर।तिल जव लोह अन्न धन बस्तर॥
दान दिये से होंय सुखारी।सोइ शनि सुन यह विनय हमारी॥
नाथ दया तुम मोपर कीजै।कोटिक विघ्न क्षणिक महँ छीजै॥
वंदत नाथ जुगल कर जोरी।सुनहु दया कर विनती मोरी॥
कबहुँक तीरथ राज प्रयागा।सरयू तोर सहित अनुरागा॥
कबहुँ सरस्वती शुद्ध नार महँ।या कहुँ गिरी खोह कंदर महँ॥
ध्यान धरत हैं जो जोगी जनि।ताहि ध्यान महँ सूक्ष्म होहि शनि॥
है अगम्य क्या करूँ बड़ाई।करत प्रणाम चरण शिर नाई॥
जो विदेश से बार शनीचर।मुड़कर आवेगा निज घर पर॥
रहैं सुखी शनि देव दुहाई।रक्षा रवि सुत रखैं बनाई॥
जो विदेश जावैं शनिवारा।गृह आवैं नहिं सहै दुखारा॥
संकट देय शनीचर ताही।जेते दुखी होई मन माही॥
सोई रवि नन्दन कर जोरी।वन्दन करत मूढ़ मति थोरी॥
ब्रह्मा जगत बनावन हारा।विष्णु सबहिं नित देत अहारा॥
हैं त्रिशूलधारी त्रिपुरारी।विभू देव मूरति एक वारी॥
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इकहोइ धारण करत शनि नित।वंदत सोई शनि को दमनचित॥
जो नर पाठ करै मन चित से।सो नर छूटै व्यथा अमित से॥
हौं सुपुत्र धन सन्तति बाढ़े।कलि काल कर जोड़े ठाढ़े॥
पशु कुटुम्ब बांधन आदि से।भरो भवन रहिहैं नित सबसे॥
नाना भाँति भोग सुख सारा।अन्त समय तजकर संसारा॥
पावै मुक्ति अमर पद भाई।जो नित शनि सम ध्यान लगाई॥
पढ़ै प्रात जो नाम शनि दस।रहैं शनिश्चर नित उसके बस॥
पीड़ा शनि की कबहुँ न होई।नित उठ ध्यान धरै जो कोई॥
जो यह पाठ करैं चालीसा।होय सुख साखी जगदीशा॥
चालिस दिन नित पढ़ै सबेरे।पातक नाशै शनी घनेरे॥
रवि नन्दन की अस प्रभुताई।जगत मोहतम नाशै भाई॥
याको पाठ करै जो कोई।सुख सम्पति की कमी न होई॥
निशिदिन ध्यान धरै मनमाहीं।आधिव्याधि ढिंग आवै नाहीं॥
॥ दोहा ॥
पाठ शनिश्चर देव को,कीहौं ‘विमल’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन,हो भवसागर पार॥
जो स्तुति दशरथ जी कियो,सम्मुख शनि निहार।
सरस सुभाषा में वही,ललिता लिखें सुधार॥
श्री शनिदेव चालीसा का महत्व (माहात्म्य):शास्त्रों के अनुसार शनिदेव मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। यदि किसी की कुंडली में साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, तो शनिदेव चालीसा का नियमित पाठ अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
इसका पाठ करने से –
- शनि दोष का प्रभाव कम होता है
- न्याय और संतुलन की भावना आती है
- रोग, शत्रु और बाधाओं से रक्षा होती है
- मानसिक तनाव में कमी आती है
शनिवार के दिन विशेष रूप से इसका पाठ शुभ फल देता है।
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सरल अर्थ (Summary Meaning)
श्री शनिदेव चालीसा में शनिदेव की महिमा, उनके स्वरूप, शक्ति और कृपा का वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि शनिदेव भक्तों के दुख हरते हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन से कष्ट, भय और बाधाएँ दूर हो जाती हैं। श्री शनिदेव चालीसा का नियमित पाठ करने से ग्रह बाधाएँ शांत होती हैं, नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। यह चालीसा भक्तों को भय, रोग, आर्थिक संकट तथा मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने में सहायक मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया शनिदेव का स्मरण जीवन में न्याय, शांति और सफलता प्रदान करता है।
पढ़ने की विधि
- शनिदेव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक व सरसों के तेल का दीप जलाएँ।
- काले तिल या काले फूल अर्पित करें।
- शांत मन से श्री शनिदेव चालीसा का पाठ करें।
- अंत में “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप करें।
लाभ (Benefits)
- शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है।
- जीवन के कष्ट, रोग और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
- कर्मों का शुभ फल प्राप्त होता है।
- धन, कार्य और व्यापार में स्थिरता आती है।
- भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
कब पढ़ें (Best Time)
- विशेष रूप से शनिवार के दिन पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- शनि प्रदोष, अमावस्या और शनि जयंती पर पाठ श्रेष्ठ फल देता है।
- साढ़ेसाती या शनि दशा में प्रतिदिन पाठ करना लाभकारी होता है।
श्री शनिदेव चालीसा के चमत्कार – कहा जाता है कि नियमित पाठ से:
- शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव शांत होता है।
- जीवन के कष्ट, बाधाएँ और दुर्भाग्य दूर होते हैं।
- शत्रु और विरोधी शांत हो जाते हैं।
- आर्थिक संकट और कर्ज से राहत मिलती है।
- मन में धैर्य, स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
ध्यान देने योग्य बातें
- पाठ करते समय मन को शांत और एकाग्र रखें।
- शनिवार के दिन विशेष रूप से पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनिदेव का स्मरण करें।
- काले तिल या काले फूल अर्पित करना लाभकारी होता है।
- प्रतिदिन एक ही समय पर पाठ करने से शीघ्र फल मिलता है।
