श्रीराम

Shri Ram for You & Your Family

श्रीराम प्रारंभ भी हैं, पथ भी हैं… और अंत परम शांति भी।

जहाँ कर्तव्य है, वहाँ राम हैं… जहाँ सत्य है, वहाँ राम हैं।
राम शक्ति हैं, पर विनम्रता के साथ।
राम वीरता हैं, पर करुणा के साथ।
राम राजा हैं, पर पहले धर्म के सेवक हैं।
श्रीराम बताते हैं कि महानता अधिकार से नहीं, आचरण से आती है। श्रीराम का जीवन त्याग की तपस्या है, निष्ठा की पराकाष्ठा है, और मर्यादा की सर्वोच्च सीमा है। उन्होंने पिता के वचन को ईश्वर का आदेश मान लिया, भाई के प्रेम को अपना सौभाग्य समझा, माता की आज्ञा को सम्मान दिया, और प्रजा के हित को स्वयं से ऊपर रखा।

सत्य कठिन हो सकता है, पर पराजित नहीं होता।
धर्म चुनौतीपूर्ण हो सकता है, पर अंततः विजय उसी की होती है।
वे प्रारंभ भी हैं, प्रेरणा भी… वे संघर्ष भी हैं, समाधान भी… वे मर्यादा भी हैं, और मोक्ष का मार्ग भी। श्रीराम का स्मरण मन को स्थिर करता है, विचारों को पवित्र करता है, और जीवन को उद्देश्य देता है।

श्रीराम – संग्रह 

मर्यादा पुरुषोत्तम, धर्म के रक्षक और आदर्श जीवन के प्रतीक भगवान श्रीराम की दिव्य कृपा को समर्पित यह पावन संग्रह भक्तों के लिए राम चालीसा, राम रक्षा स्तोत्र, रामाष्टक, स्तुति, आरती, मंत्र, व्रत विधि तथा राम नवमी और रामायण कथा से जुड़े पवित्र पाठों को एक स्थान पर प्रस्तुत करता है। इस संग्रह का उद्देश्य परिवार में प्रेम और समरसता बनाए रखना तथा आत्मबल और आस्था को दृढ़ करना है।

भगवान श्रीराम का मंत्र है, जो मन
को शांति और जीवन को धर्म के मार्ग पर ले जाता है।

आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं काञ्चनं
वैदेहीहरणं जटायुमरणं सुग्रीवसम्भाषणम्।

शुद्धब्रह्मपरात्पर राम्॥१॥
कालात्मकपरमेश्वर राम्॥२॥

श्री रघुबीर भक्त हितकारी।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

भगवान श्री राम की आरती

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन,
हरण भवभय दारुणम्।

गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
आसपास सखियाँ सुख दैनी,

बन्दौं रघुपति करुना निधान।
जाते छूटै भव-भेद ग्यान॥

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत् चित् आनन्द शिव सुन्दर की।

जय जानकीनाथा,जय श्रीरघुनाथा।
दोउ कर जोरें बिनवौं,प्रभु!

ऐसी आरती राम रघुबीर की करहि मन।
हरण दुखदुन्द गोविन्द आनन्दघन॥

आरती श्री रामायणजी की।
कीरति कलित ललित सिय पी की।।

श्री राम अष्टकम्

कृतार्तदेववन्दनंदिनेशवंशनन्दनम्।
सुशोभिभालचन्दनंनमामि राममीश्वरम्॥

श्यामाम्बुदाभमरविन्दविशालनेत्रं
बन्धूकपुष्पसदृशाधरपाणिपादम्।

चिदाकारो धातापरमसुखदः पावन-
तनुर्मुनीन्द्रैर्यो-गीन्द्रैर्यतिपतिसुरेन्द्रैर्हनुमता।

Inner Peace & Resilience की तलाश ?
जब परिस्थितियाँ नियंत्रण में न हों, तब?

भगवान श्रीराम की दिव्य कृपा

मर्यादा पुरुषोत्तम धर्मसंस्थापक, करुणामूर्ति श्रीराम —

धर्म की स्थापना – जीवन में सत्य, मर्यादा और कर्तव्य का पालन करने की शक्ति श्रीराम की कृपा से प्राप्त होती है।
साहस और धैर्य के दाता – कठिन परिस्थितियों में भी संयम, स्थिरता और आत्मबल बनाए रखने की प्रेरणा राम नाम से मिलती है।
परिवार में प्रेम और समरसता – जहाँ राम का आदर्श होता है, वहाँ सम्मान, निष्ठा और मधुर संबंध स्थायी होते हैं।
आत्मिक शांति और मुक्ति का मार्ग – “राम” नाम का जप मन को पवित्र, विचारों को शुद्ध और जीवन को उद्देश्य प्रदान करता है।

श्रद्धा और मनोकामना के अनुसार

नियमित पाठ ईश्वर की कृपा

कर्तव्य निभाने की शक्ति मिलती है,
अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का आत्मबल मिलता है,
और परिवार व समाज में प्रेम, सम्मान और समरसता बनी रहती है।

श्रीराम की कृपा से —

मर्यादा केवल बाहरी आचरण नहीं होती — मन के भीतर के क्रोध, अहंकार, मोह और अन्याय पर विजय भी मर्यादा ही है। श्रीराम उन अदृश्य दुर्बलताओं को जीतने की प्रेरणा देते हैं, जो आत्मा को धर्ममार्ग से भटका देती हैं।

उनका शांत मुख संयम और करुणा का संदेश देता है।
उनके चरण त्याग और कर्तव्यपरायणता की राह दिखाते हैं।
उनका वनवास सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे बदल जाएँ, सिद्धांत नहीं बदलने चाहिए। उनका रामराज्य दर्शाता है कि न्याय, समता और करुणा से ही सच्चा सुख संभव है।
भगवान श्रीराम हिंदू धर्म में आदर्श पुरुष और धर्म के संरक्षक माने जाते हैं।
जीवन के हर संघर्ष में उनका स्मरण साहस देता है, हर निर्णय में विवेक देता है, और हर संबंध में निष्ठा का भाव भरता है।
राम आस्था हैं…राम आदर्श हैं…राम ही सत्य, धर्म और जीवन की सर्वोच्च मर्यादा हैं।

श्रीराम की पूजा क्यों की जाती है?

भगवान श्रीराम धर्म, सत्य और मर्यादा के सर्वोच्च आदर्श हैं। वे आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति और आदर्श शासक के रूप में जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
राम जी की पूजा केवल इच्छाओं की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि जीवन में कर्तव्यनिष्ठा, धैर्य, संयम और सदाचार को अपनाने की शक्ति पाने के लिए की जाती है।
“श्री राम जय राम जय जय राम” का पावन जप मन को स्थिर करता है, आत्मबल बढ़ाता है और जीवन को मर्यादा तथा उद्देश्य से जोड़ता है।
जय श्रीराम।


कुलदेवी की पूजा क्यों  ?

कुलदेवी की पूजा परिवार की सुरक्षा, सुख-समृद्धि, वंश वृद्धि और पूर्वजों की परंपरा बनाए रखने के लिए की जाती है। उन्हें कुल का रक्षक माना जाता है, जिनके आशीर्वाद के बिना विवाह, मुंडन जैसे शुभ कार्य अधूरे माने जाते हैं। कुलदेवी की उपासना से नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं और जीवन में शांति तथा मंगल बना रहता है।
कुलदेवी को प्रसन्न करने हेतु प्रातः-सायं दीपक प्रज्वलित कर तथा कुलदेवी स्तोत्रम् का श्रद्धा से पाठ करने से घर में सुख-शांति, मंगल और दिव्य सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

भगवान श्रीराम

जहाँ राम का नाम है, वहाँ साहस, शांति और धर्म का प्रकाश स्वयं प्रकट होता है।

1️. मानसिक अशांति, भय या चिंता में
राम नाम जप – “श्री राम जय राम जय जय राम” (108 बार)
राम रक्षा स्तोत्र
मन को स्थिर करता है, भय दूर करता है और आत्मबल बढ़ाता है।
2️. संकट, बाधा या नकारात्मक परिस्थितियों में
सुंदरकांड पाठ
हनुमान चालीसा (राम स्मरण के साथ)
संकटों से रक्षा और कार्य सिद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी।
3️. परिवार में कलह या अशांति होने पर
रामायण का अयोध्याकांड
संपूर्ण रामचरितमानस पाठ (साप्ताहिक)
घर में प्रेम, समरसता और मर्यादा स्थापित होती है।
4️. महत्वपूर्ण कार्य या नई शुरुआत से पहले
राम स्तुति या रामाष्टक
11 या 21 बार “श्री राम जय राम जय जय राम” मंत्र जप
कार्य में सफलता और सही निर्णय की शक्ति मिलती है।
5️. आत्मबल और धैर्य बढ़ाने के लिए
राम चालीसा (प्रतिदिन)
बालकांड या सुंदरकांड का नियमित पाठ साहस, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
6️. आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष भावना के लिए
राम नाम जप (निरंतर)
सम्पूर्ण रामायण का श्रद्धा से अध्ययन
मन शुद्ध होता है और जीवन धर्ममय बनता है।
विशेष दिवस
राम नवमी – पूर्ण रामायण या सुंदरकांड पाठ
प्रत्येक मंगलवार/गुरुवार – राम चालीसा या राम रक्षा स्तोत्र
श्रद्धा, नियम और सच्चे मन से किया गया राम स्मरण हर परिस्थिति में सहारा बनता है।

श्री राम जय राम जय जय राम” का पावन जप मन को स्थिर करता है, आत्मबल बढ़ाता है और जीवन को मर्यादा तथा उद्देश्य से जोड़ता है।

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