• जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा।
  • सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥
  • हे लक्ष्मीपति प्रभु! आपकी जय हो। आप भक्तों के पाप और कष्टों का नाश करने वाले हैं।
  • रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे।
  • आप रत्नों से सजे सिंहासन पर शोभित होते हैं।
  • प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो।
  • कलियुग में ब्राह्मण को दर्शन देकर आपने भक्तों का उद्धार किया।
  • वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी।
  • जिसने श्रद्धा छोड़ी, उसे फल भोगना पड़ा; फिर प्रभु की स्तुति से उसे कृपा मिली।
  • चढ़त प्रसाद सवाया कदली फल मेवा।
  • केला, मेवा, धूप, दीप और तुलसी से भगवान प्रसन्न होते हैं।
  • जो कोई नर गावे मनवांछित फल पावे।
  • जो भी भक्त इस आरती का गान करता है, उसे इच्छित फल प्राप्त होता है।

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