॥ श्री सीताराम आरती ॥

भगवान श्रीराम और माता सीता की आरती भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और मंगलकारी मानी जाती है। श्री सीताराम आरती में भगवान राम और माता जानकी के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा और कृपा का सुंदर वर्णन मिलता है। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से इस आरती का गान करते हैं, उनके जीवन में शांति, सुख और धर्म का प्रकाश फैलता है।
यह आरती विशेष रूप से राम नवमी, विवाह वर्षगांठ, परिवारिक मंगल कार्यों और दैनिक पूजा में गाई जाती है।
॥ श्री सीताराम आरती ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
आसपास सखियाँ सुख दैनी,सजि नव साज सिन्गार सुनैनी,
बीन सितार लिएँ पिकबैनी,गाइ सुराग सुनाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
अनुपम छबि धरि दन्पति राजत,नील पीत पट भूषन भ्राजत,
निरखत अगनित रति छबि लाजत,नैनन को फल पाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
नीरज नैन चपल चितवनमें,रुचिर अरुनिमा सुचि अधरनमें,
चन्द्रबदन की मधु मुसकनमेंनिज नयनाँ अरुझाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
कंचन थार सँवारि मनोहर,घृत कपूर सुभ बाति ज्योतिकर,
मुरछल चवँर लिएँ रामेस्वरहरषि सुमन बरसाओ॥
गाओ गाओ री, प्रियाप्रीतम की आरती गाओ।
श्री सीताराम आरती का माहात्म्य: शास्त्रों में कहा गया है कि श्रीराम और माता सीता का स्मरण करने से जीवन के दुख और संकट दूर होते हैं।
सीताराम आरती गाने से –
- घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- परिवार में प्रेम और एकता बढ़ती है।
- मन में भक्ति और धर्म के प्रति आस्था जागृत होती है।
- इस आरती का नियमित पाठ भगवान श्रीराम और माता सीता की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना गया है।
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सरल अर्थ: इस आरती में भक्त भगवान श्रीराम और माता सीता के सुंदर और दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हैं।
- सखियाँ सुंदर श्रृंगार करके वीणा और सितार के साथ प्रभु की आरती गा रही हैं।
- भगवान श्रीराम और माता सीता दिव्य वस्त्र और आभूषणों से सुशोभित होकर विराजमान हैं।
- उनके कमल जैसे नेत्र और मधुर मुस्कान भक्तों के मन को मोह लेते हैं।
- भक्त स्वर्ण थाल में दीप और कपूर जलाकर आरती उतारते हैं और पुष्प अर्पित करते हैं।
- इस प्रकार यह आरती भगवान के प्रति प्रेम, भक्ति और समर्पण को प्रकट करती है।
