॥ सिद्धिदात्री की आरती॥

माँ सिद्धिदात्री की आरती श्रद्धा और भक्तिभाव से माता के दिव्य स्वरूप का स्मरण कराती है। इसमें माता को सिद्धि प्रदान करने वाली, भक्तों की रक्षक और करुणामयी जगदम्बा के रूप में नमन किया गया है।
आरती के माध्यम से भक्त माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करता है और उनके प्रति विश्वास तथा समर्पण का भाव प्रकट करता है। नियमित रूप से आरती का पाठ या श्रवण आध्यात्मिक साधना और भक्तिभाव का एक सुंदर माध्यम माना जाता है।
नवरात्रि, दुर्गा पूजा, शुक्रवार या किसी भी संकट के समय इस आरती का पाठ करने से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
॥ मां सिद्धिदात्री की आरती ॥
जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
जब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में तो न कोई विधि है
तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है॥
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तुम सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उसके रहे न अधूरे॥
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली॥
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महा नंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता॥
आरती का माहात्म्य:
- माँ सिद्धिदात्री की आरती श्रद्धा और भक्तिभाव से माता के दिव्य स्वरूप का स्मरण कराती है। इसमें माता को सिद्धि प्रदान करने वाली, भक्तों की रक्षक और करुणामयी जगदम्बा के रूप में नमन किया गया है।
- आरती के माध्यम से भक्त माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करता है और उनके प्रति विश्वास तथा समर्पण का भाव प्रकट करता है। नियमित रूप से आरती का पाठ या श्रवण आध्यात्मिक साधना और भक्तिभाव का एक सुंदर माध्यम माना जाता है।
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इस आरती में माँ सिद्धिदात्री की महिमा और उनकी कृपा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। भक्त माता को सिद्धि प्रदान करने वाली, भक्तों की रक्षक और करुणामयी माता के रूप में प्रणाम करता है।
भक्त कहता है कि माँ सिद्धिदात्री का नाम श्रद्धा से लेने और उनका स्मरण करने से मन में पवित्रता और भक्ति का भाव जागृत होता है। माता अपने भक्तों के कठिन कार्यों में सहायता करती हैं और अपने स्नेह व कृपा की छाया बनाए रखती हैं।
भजन में माता की दया और ममता का स्मरण करते हुए कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, वह स्वयं को माता के चरणों में सुरक्षित और सौभाग्यशाली अनुभव करता है।
अंत में भक्त माँ सिद्धिदात्री से अपने जीवन में आश्रय, कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करता है तथा माता के पावन स्वरूप को श्रद्धापूर्वक नमन करता है।
- इस भजन में माँ सिद्धिदात्री की महिमा और उनकी कृपा का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। भक्त माता को सिद्धि प्रदान करने वाली, भक्तों की रक्षक और करुणामयी माता के रूप में प्रणाम करता है।
- भक्त कहता है कि माँ सिद्धिदात्री का नाम श्रद्धा से लेने और उनका स्मरण करने से मन में पवित्रता और भक्ति का भाव जागृत होता है। माता अपने भक्तों के कठिन कार्यों में सहायता करती हैं और अपने स्नेह व कृपा की छाया बनाए रखती हैं।
- भजन में माता की दया और ममता का स्मरण करते हुए कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, वह स्वयं को माता के चरणों में सुरक्षित और सौभाग्यशाली अनुभव करता है।
- अंत में भक्त माँ सिद्धिदात्री से अपने जीवन में आश्रय, कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करता है तथा माता के पावन स्वरूप को श्रद्धापूर्वक नमन करता है।
