आरती

Aarti for You & Your Family

“आरती हिंदू पूजा-पद्धति में देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता व्यक्त करने का एक पारंपरिक माध्यम है। इस संग्रह में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रसिद्ध आरतियाँ उनके संबंधित स्वरूप और धार्मिक भाव के साथ एक स्थान पर दी गई हैं।”

आरती

माता जी की आरती

माँ अम्बे के जगदम्बा, सिंहवाहिनी और शक्ति स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध आरती, जिसमें उनके तेज, करुणा और असुर संहारक रूप का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

माँ दुर्गा के जगदम्बा, अष्टभुजा और सिंहवाहिनी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माँ के चरणों में भक्ति और शरण की प्रार्थना करते हुए उनके करुणामय स्वरूप का स्मरण करता है।

माता लक्ष्मी के कमलासना, विष्णुप्रिया और मंगलमयी स्वरूप की महिमा का भक्तिभाव से स्मरण कराने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा के साथ माँ लक्ष्मी की स्तुति और प्रार्थना करता है।

माता पार्वती के जगदम्बा, गौरी, दुर्गा और आदिशक्ति स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके सिंहवाहिनी, सती और जगत की जननी रूप का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

माँ वैष्णोदेवी के पावन स्वरूप, शक्ति और मातृभाव की महिमा का भक्तिभाव से स्मरण कराने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा के साथ माता के चरणों में अपनी प्रार्थना अर्पित करता है।

एकादशी माता की पावन आरती, जिसमें वर्षभर आने वाली विभिन्न एकादशियों के नाम, स्वरूप और धार्मिक महत्व का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है तथा भगवान विष्णु की आराधना से जुड़ी एकादशी व्रत परंपरा का वर्णन मिलता है।

माँ संतोषी के करुणामयी स्वरूप, संतोष और भक्तिभाव की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माँ के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए सुख, शांति और संतोष की प्रार्थना करता है।

माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी के दिव्य स्वरूप, त्रिपुरेश्वरी महिमा और मातेश्वरी रूप की स्तुति करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ का स्मरण करता है।

माँ शीतला के शीतल, कल्याणकारी और भक्तवत्सल स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें माता के दिव्य स्वरूप, देवताओं द्वारा की गई स्तुति और भक्तों की श्रद्धा का भाव प्रकट होता है।

माँ गंगा के पवित्र स्वरूप, उनकी महिमा और भक्तों के प्रति करुणामय भाव का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें गंगा माता के पृथ्वी पर अवतरण और राजा सगर के पुत्रों के उद्धार का स्मरण किया जाता है।

माँ सरस्वती के ज्ञान, विद्या, बुद्धि और वाणी की अधिष्ठात्री स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनकी वीणा, माला और हंसवाहिनी रूप का स्मरण करते हुए ज्ञान के प्रकाश की प्रार्थना की जाती है।

अहोई माता के मातृस्वरूप, जगमाता और शुभदायिनी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा के साथ माता का स्मरण करते हुए संतान के सुख, परिवार के मंगल और कल्याण की प्रार्थना करता है।

माँ तुलसी के पवित्र और भगवान विष्णु प्रिय स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें तुलसी माता की भक्ति, सेवा और श्रीहरि के प्रति उनके विशेष संबंध का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

श्री राधा रानी के वृषभानुसुता, कृष्णप्रिय और प्रेममयी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके दिव्य प्रेम, भक्ति, करुणा और श्रीकृष्ण के साथ पावन संबंध का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

माता गायत्री के वेदमाता, आदिशक्ति और ज्ञानमयी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माँ से सत्य के मार्ग पर चलने, शुद्ध बुद्धि और पवित्र मन प्रदान करने की प्रार्थना करता है।

माता गायत्री के वेदमाता, ज्ञान और दिव्य शक्ति के स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त ज्ञानदीप और श्रद्धा के साथ माता की आराधना तथा प्रार्थना करता है।

माँ विन्ध्येश्वरी के पर्वतवासिनी और आदिशक्ति स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त धूप, दीप, नैवेद्य और भोग अर्पित कर माँ की श्रद्धापूर्वक आराधना करता है।

माँ महाकाली के उग्र और करुणामय स्वरूप, शक्ति, भक्तवत्सलता और दुष्ट-संहारक रूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें शुंभ-निशुंभ, महिषासुर और रक्तबीज के संहार तथा भक्तों के प्रति माता की करुणा का स्मरण किया जाता है।

नवदुर्गा आरती

माँ ब्रह्मचारिणी के तप, साधना, ज्ञान और संयम के स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माँ को गायत्री और वेदों की माता के रूप में स्मरण करते हुए श्रद्धा से उनकी स्तुति करता है।

माँ कूष्माण्डा के नवदुर्गा स्वरूप, जगदम्बा और भक्तवत्सल रूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माँ के अनेक नामों का स्मरण करते हुए उनकी कृपा और अपने कष्टों से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

माँ कात्यायनी के शक्ति, तेज और दिव्य स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ माँ कात्यायनी की स्तुति करते हैं।

माँ महागौरी के जगदम्बा, गौरी और शक्ति स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके दिव्य स्वरूप, विभिन्न रूपों और भक्तों के प्रति करुणामयी भाव का स्मरण किया जाता है।

माँ शैलपुत्री के नवदुर्गा के प्रथम स्वरूप, पर्वतराज हिमालय की पुत्री और भगवान शिव की प्रिय भवानी रूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा से माँ का स्मरण और प्रार्थना करता है।

माँ चन्द्रघण्टा के नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप, शीतल, करुणामयी और भक्तवत्सल रूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा से माँ की आराधना और अपनी मनोकामना की प्रार्थना करता है।

माँ स्कन्दमाता के दुर्गा के पाँचवें स्वरूप, जगजननी और भक्तवत्सल रूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माता से भक्ति, शक्ति और अपनी शरण में रखने की प्रार्थना करता है।

माँ कालरात्रि के महाकाली, महाशक्ति और दुष्ट-संहारक स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें माँ के खड्ग-खप्पर धारण किए दिव्य रूप और भक्तों द्वारा की गई स्तुति का भाव मिलता है।

माँ सिद्धिदात्री के जगदम्बे, अष्टभुजा और करुणामयी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माँ की शरण में रहकर भक्ति और आशीर्वाद की प्रार्थना करता है।

देवताओं की आरती

विभिन्न देवी-देवताओं की आरतियाँ उनके स्वरूप, गुण और महिमा का भक्तिभाव से स्मरण कराती हैं। इस संग्रह में गणेश, हनुमान, शिव, श्रीराम, श्रीकृष्ण और अन्य देवताओं की प्रसिद्ध आरतियाँ शामिल हैं।

गणेश आरती

भगवान श्रीगणेश के सुखकर्ता, दुःखहर्ता, मंगलमूर्ति, लंबोदर, वक्रतुण्ड और त्रिनयन स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा के साथ गणेश जी का स्मरण करते हुए उनकी कृपा और संकट में रक्षा की प्रार्थना करता है।

भगवान गणेश के एकदन्त, चार भुजाधारी और मूषकवाहन स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध आरती, जिसमें माता पार्वती और महादेव के पुत्र गणेश जी की स्तुति तथा भक्तिभाव से उनकी शरण और कृपा की प्रार्थना की जाती है।

भगवान गणेश के एकदंत, गजवदन, विघ्नविनाशक और रिद्धि-सिद्धि सहित मंगलकारी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके जन्म, मूषक वाहन और भक्तों द्वारा की जाने वाली आराधना का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

भगवान गणेश के गजबदन, गणनायक और विघ्नहर्ता स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके दिव्य स्वरूप और पूजनीय गुणों का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

हनुमान आरती

भगवान हनुमान के पवनपुत्र, अंजनीसुत, रामभक्त और संकट मोचन स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके पराक्रम, भक्ति और दिव्य स्वरूप का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

भगवान हनुमान के पवनसुत, वीर, रामभक्त और संकटों का निवारण करने वाले स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके पराक्रम, श्रीराम के प्रति निष्ठा और भक्तों के प्रति करुणा का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

श्री बालाजी अर्थात् भगवान हनुमान के पवनपुत्र, अंजनीसुत, संकट मोचन और रणधीर स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें उनके रामभक्ति, पराक्रम और भक्त-रक्षा से जुड़े प्रसंगों का स्मरण किया जाता है।

शिव आरती

भगवान शिव के महादेव, त्रिनेत्रधारी और करुणामय स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली प्रसिद्ध आरती, जिसमें भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान शिव की स्तुति करता है।

भगवान शंकर के जग-निवास, अजर-अमर, त्रिनेत्रधारी, गंगाधर और कैलासवासी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त शिव की शरण, शांति और भक्ति की प्रार्थना करता है।

भगवान शिव के सत्य, सनातन, योगी, रुद्र और करुणामय स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त शिव की शरण और निर्मल बुद्धि की प्रार्थना करता है।

भगवान गङ्गाधर के कैलासवासी, त्रिनेत्रधारी और गिरिजाधीश स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें शिव-पार्वती के दिव्य स्वरूप और भगवान शिव के डमरू-त्रिशूल धारण किए रूप का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

भगवान शिव के कैलासवासी, गंगाधर, त्रिशूलधारी और अविनाशी स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त माता पार्वती के साथ विराजमान शिवजी का भक्तिभाव से स्मरण करते हुए उनकी कृपा और अपने अपराधों की क्षमा की प्रार्थना करता है।

राम आरती

भगवान श्रीराम के रघुवर, सत्-चित्-आनन्द, दशरथनन्दन और मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रीराम को सुर-मुनियों के रक्षक और भक्तों के हृदय में विराजमान प्रभु के रूप में स्मरण करता है।

भगवान श्रीराम के करुणामय, कृपालु, मर्यादा पुरुषोत्तम और भक्तवत्सल स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रीराम के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा, भक्ति और शरणागति का भाव प्रकट करता है।

भगवान श्रीराम के जानकीनाथ, रघुनाथ, भक्तवत्सल और भक्ति-मुक्ति दाता स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रीराम को अपने प्राण, माता-पिता और सज्जन-संगी के रूप में स्मरण करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा और भक्ति की प्रार्थना करता है।

भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रिय-प्रियतम, दम्पति राज और मनोहर स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त सीताराम के दिव्य श्रृंगार और अनुपम छवि का भक्तिभाव से स्मरण करते हुए उनके दर्शन का भाव प्रकट करता है।

भगवान श्रीराम के रघुपति, करुणानिधान, रघुवंश के सुखदाता और भक्तवत्सल स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रीराम के चरण-कमलों का स्मरण करते हुए मोह, अज्ञान और अहंकार के अंधकार से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

भगवान श्रीराम के रघुवीर, गोविन्द, आनन्दघन और सर्वव्यापक स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त श्रीराम को सर्वत्र विराजमान प्रभु के रूप में स्मरण करते हुए अपने अहंकार, मोह और अज्ञान के अंधकार को दूर करने की प्रार्थना करता है।

कृष्ण आरती

भगवान श्रीकृष्ण के कुंजबिहारी, गिरिधर, कृष्ण मुरारी और नंदलाला स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाली सुंदर आरती, जिसमें भक्त उनके बैजंती माला, मधुर मुरली, कुण्डल, कस्तूरी तिलक और श्यामसुंदर स्वरूप का भक्तिभाव से स्मरण करता है।

श्री यशोदालाल की भक्ति और वात्सल्य भाव से जुड़ी सुंदर आरती। श्रद्धा के साथ आरती का पाठ भक्तिमय वातावरण और श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम को समर्पित करने का माध्यम है।

भगवान कृष्ण कन्हैया की प्रसिद्ध आरती, जिसमें उनके दिव्य स्वरूप, बाल लीलाओं, रासलीला, पराक्रम और श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण के गिरिधारी स्वरूप को समर्पित भक्तिपूर्ण आरती, जिसमें उनके गोवर्धनधारी, वंशीधर, गोपाल और ब्रजवासियों के प्रिय स्वरूप की महिमा का स्मरण किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण के नटवर स्वरूप को समर्पित प्रसिद्ध आरती, जिसमें उनके नंदलाल, गोपाल, गोवर्धनधारी और वंशीधर रूपों की महिमा का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के जुगल स्वरूप को समर्पित सुंदर आरती, जिसमें नन्दलाल, गिरिधारी, मुरलीधर और नटवर कृष्ण की दिव्य छवि का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

श्री बाँके बिहारी जी के मनोहर श्यामसुंदर स्वरूप, मोर मुकुट, मधुर बंशी और भक्तवत्सल भाव की महिमा का भक्तिभाव से स्मरण कराने वाली सुंदर आरती।

देव आरती

भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित भक्तिपूर्ण आरती, जिसमें भक्त प्रह्लाद की रक्षा और भगवान नृसिंह की दिव्य महिमा का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

भगवान कुबेर को समर्पित प्रसिद्ध आरती, जिसमें उनके यक्षराज, देवताओं के कोषाध्यक्ष और वैभव के अधिपति स्वरूप की महिमा का भक्तिभाव से स्मरण किया जाता है।

भगवान शनिदेव को समर्पित प्रसिद्ध आरती, जिसमें उनके न्यायकारी स्वरूप, कर्मफल और भक्तों के प्रति कृपा का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

भगवान सूर्यदेव को समर्पित प्रसिद्ध आरती, जिसमें उनके प्रकाशमय स्वरूप, तेज और जीवनदायी शक्ति की श्रद्धापूर्वक स्तुति की जाती है।

आरती का धार्मिक महत्व

आरती पूजा-पद्धति में देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का पारंपरिक माध्यम है। दीपक की ज्योति के साथ आरती करते समय भक्त अपने आराध्य का स्मरण और गुणगान करते हैं।
मंदिरों में आरती पूजा के महत्वपूर्ण अवसरों पर की जाती है, जबकि घरों में भी भक्त अपनी पारिवारिक परंपरा और श्रद्धा के अनुसार आरती करते हैं। आरती के समय दीपक, घंटी और शंख आदि का प्रयोग कई धार्मिक परंपराओं में किया जाता है।

अपनी पूजा के अनुसार आरती चुनें

भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती का चयन कर सकते हैं।

आरती के समय दीपक क्यों जलाया जाता है?

दीपक की ज्योति को प्रकाश, पवित्रता और ईश्वर के स्मरण का प्रतीक

आरती के समय दीपक जलाना हिंदू पूजा-पद्धति की एक पारंपरिक प्रथा है। दीपक की ज्योति को प्रकाश, पवित्रता और ईश्वर के स्मरण का प्रतीक माना जाता है। आरती करते समय भक्त दीपक की ज्योति के माध्यम से अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं।

आरती का महत्व और पूजा की परंपरा


आरती हिंदू पूजा-पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूजा के अंत में दीपक या ज्योति के साथ देवी-देवताओं की आरती की जाती है। आरती के माध्यम से भक्त श्रद्धा, कृतज्ञता और भक्ति भाव से अपने आराध्य का स्मरण करते हैं।
आरती के दौरान दीपक, घंटी, शंख और भजन जैसे पारंपरिक साधनों का प्रयोग कई पूजा परंपराओं में किया जाता है। अलग-अलग देवी-देवताओं की आरतियों में उनके स्वरूप, गुण और महिमा का वर्णन मिलता है। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती का पाठ या गायन करते हैं।

आरती कब की जाती है?

देवी-देवताओं की आरतियाँ उनके स्वरूप, गुण, महिमा और भक्ति भाव का स्मरण कराती हैं।

आरती सामान्यतः पूजा के अंत में की जाती है। सुबह और शाम की पूजा के अलावा मंदिरों और धार्मिक अवसरों पर भी आरती की जाती है। आरती का समय संबंधित मंदिर, पूजा-पद्धति और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

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माँ लक्ष्मी के सौभाग्य, समृद्धि और ऐश्वर्य स्वरूप की महिमा का वर्णन करने वाला भक्तिपूर्ण संग्रह, जिसमें आरती, चालीसा, अष्टकम् और स्तोत्र जैसे पावन पाठ संकलित हैं।

प्रसिद्ध देवी-देवताओं के अष्टकमों का संपूर्ण संग्रह। यहाँ आप शिव, विष्णु, देवी, गणेश, हनुमान और अन्य देवी-देवताओं के अष्टकम सरल रूप में पढ़ सकते हैं।

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